Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
जय जय ब्रज-बासी श्रेष्ठ नन्द-राज जय जय ब्रजेश्वरी श्रेष्ठ गोपी माझ
अर्थ

जय जय नन्द महाराज की, जो व्रजवासियों में सर्वश्रेष्ठ हैं! जय जय व्रज की रानी की, जो गोपियों में सर्वश्रेष्ठ हैं!

जय जय रोहिणी-नन्दन बलराम जय जय राधा-कृष्ण स्वयं रस-धाम
अर्थ

जय जय बलराम की, जो रोहिणी के पुत्र हैं! जय जय राधा-कृष्ण की, जो समस्त माधुर्य के धाम हैं!

जय जय राधा सखी ललिता सुन्दरी सखीर परम श्रेष्ठ रूपेर माधुरी
अर्थ

जय जय सुन्दरी ललिता की, जो राधा की सखी हैं! वे राधा की सखियों में सर्वश्रेष्ठ हैं। उनका रूप मधुर सौन्दर्य और माधुर्य से भरा है।

जय जय श्री-बिशाखा चम्पकलतिका रङ्ग-देबी सुदेबी तुङ्गबिद्या इन्दुरेखा
अर्थ

जय जय श्री विशाखा, चम्पकलतिका, रंग-देवी, सुदेवी, तुंगविद्या और इन्दुरेखा की!

जय जय राधानुजा अनङ्ग-मञ्जरी त्रि-भुबन जिनि यार अङ्गेर माधुरी
अर्थ

जय जय अनंग-मंजरी की, जो राधा की छोटी बहन हैं! उनके रूप का मधुर सौन्दर्य और माधुर्य तीनों लोकों को भी परास्त करता है।

जय जय पौर्णमासी बलि योगमाया राधा-कृष्ण लीला करान यिनि आच्छादिया
अर्थ

जय जय पौर्णमासी की, जिन्हें मैं योगमाया ही कहता हूँ। वे बड़ी सावधानी और चतुराई से राधा-कृष्ण की लीलाओं की व्यवस्था करती हैं।

जय जय बृन्दा-देबी कृष्ण-प्रियतमा जय जय बीरा सखी सर्ब-मनोरम
अर्थ

जय जय वृन्दा-देवी की, जो कृष्ण को अत्यन्त प्रिय हैं! जय जय वीरा-सखी की, जो सभी के हृदय को आनन्दित करती हैं!

जय जय रत्न-मण्डप रत्न-सिंहासन जय जय राधा-कृष्ण सङ्गे गोपी-गण
अर्थ

जय जय रत्न-मण्डप और रत्न-सिंहासन की! जय जय उन गोपियों की, जो राधा-कृष्ण की सखियाँ और सहचरी हैं!

शुन शुन आरे भा-इ करित प्रार्थना ब्रजे राधा-कृष्ण-सेबा करह भाबना
अर्थ

सुनो, सुनो, हे मेरे भाई। व्रज में राधा-कृष्ण की सेवा का चिन्तन करो। प्रार्थना करो कि तुम वहाँ उनकी सेवा प्राप्त करो।

छाडि अन्य कर्म असत् आलापने ब्रजे राधा-कृष्ण करह भाबने
अर्थ

अन्य सभी कर्मों को त्याग दो। व्यर्थ गपशप को त्याग दो। व्रज में राधा-कृष्ण का चिन्तन करो।

इह सब लीला-स्थान ये करे स्मरण जन्मे जन्मे शिरे धरों तांहार चरण
अर्थ

जो कोई इन सभी लीला-स्थानों का स्मरण करता है, जन्म-जन्म मैं उसके चरण अपने सिर पर धारण करता हूँ।

श्री-गुरु-बैष्णब-पाद-पद्म करि आश नाम सङ्कीर्तन कहे नरोत्तम दास
अर्थ

अपने गुरु और वैष्णवों के चरण-कमलों को ही अपना एकमात्र लक्ष्य मानकर, नरोत्तम दास यह नाम-संकीर्तन गाते हैं।