जय जय पद्माबती सुत सुन्दर
जय जय भगवान नित्यानन्द की! वे पद्मावती के पुत्र हैं। वे सुंदर और सुडौल हैं। वे गुणों के राजा हैं। वे संसार के लोगों की आँखों की जलती पीड़ाओं को दूर करते हैं। उनका अद्भुत रूप कणा कारुण को भी फीका कर देता है।
उनका मुख अनेक चंद्रमाओं के गर्व को भी हर लेता है। उनकी मुस्कान अमृत की बूँदों से भरी है। गौर प्रभु के प्रेम में उनका हृदय अभिभूत रहता है। उनके नित नए विनोद वचनों की कोई समानता नहीं है।
उनके नेत्र झूमते हुए उज्ज्वल कमल हैं। उनके आँसू मानो बाढ़ आई गंगा हैं। खड़े हुए उनके रोम कदंब-केसर के समान हैं। वे अत्यंत सुंदर, चंचल और मनमोहक हैं। उनके वक्ष पर एक मणि-माला झूमती रहती है।
उनकी सुन्दर चाल श्रेष्ठ हाथियों को भी लजा देती है। वे मन को आनन्द देते हैं। उनकी भुजाएँ लम्बी हैं। वे सदा चंचल और अस्थिर रहते हैं। वे पतित जीवों को गले लगाते हैं और उन्हें महान् धन देते हैं। परन्तु सारे संसार में केवल दुखी घनश्याम दास को वह उपहार नहीं मिला। केवल वही ठगा गया।