कबे प्रभु अनुग्रह हबे
कब प्रभु मुझ पर कृपा करेंगे? कब मेरे गले की सांसारिक वासनाओं का फंदा कटेगा? कब मैं वृन्दावन जाऊँगा?
इस संसार का फल केवल दुःख है। मैं उस स्थान पर जाऊँगा जहाँ मैं जानता हूँ कि केवल गहन आनन्द है। तब सारे सांसारिक दुःख दूर भाग जाएँगे। मैं यमुना के तट पर रास-स्थली में जाऊँगा। वहाँ मैं भूमि पर लोटूँगा।
यदि मैं भाग्यशाली हुआ तो गोवर्धन पर्वत पर कृष्ण की मूर्ति के दर्शन करूँगा। क्या मैं ऐसा कर सकूँगा? कब मेरा तन, मन और हृदय राधा-कुण्ड और श्याम-कुण्ड की ओर दौड़ेगा?
मैं जानता हूँ कि यदि मैं उन दोनों कुण्डों में स्नान करूँ और वहीं प्राण त्यागूँ, तो मुझे कौन सी गति मिलेगी। राधामोहन दास कहते हैं, हे प्रभु, आप बड़े दयालु हैं। कृपया मेरी यह कामना पूरी करें। गद्गद स्वर में मैं आपसे यही विनती करता हूँ।