Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कीर्तन रसमय आगम अगोचर

कीर्तन रसमय आगम अगोचर केबल आनन्द-कन्द अखिल लोक-गति भकत-प्राण-पति जय गौर नित्यानन्द चन्द
अर्थ

भगवान गौर और भगवान नित्यानन्द, उन दो चन्द्रमाओं की जय हो, जो पवित्र नामों के कीर्तन के मधुर अमृत का आस्वादन करते हैं, जो वेदों की पहुँच से परे हैं, जो दिव्य आनन्द की जड़ हैं, जो सभी जीवों के परम लक्ष्य हैं और जो भक्तों के प्राणों के स्वामी हैं!

हेरि पतित गन करुनबलोकन जगभरि करल अपार भब-भय-भण्जन दुरित-निबारण धन्य श्री-चैतन्य अबतार
अर्थ

महिमामय श्री चैतन्य की जय हो, जो इस संसार में अवतरित हुए, जो पतित जीवों की ओर दया भरी आँखों से देखते हैं, जो संसार को दया की असीम बाढ़ से भर देते हैं, जो बार-बार होने वाले जन्म और मृत्यु के भय को तोड़ते हैं और जो पापों का नाश करते हैं!

हरि-सङ्कीर्तने मजिल जग-जन सुर नर नाग पशु पाखी सकल बेद सार प्रेम सुधा-धार देयल काहु ना उपेखि
अर्थ

उन्होंने देवताओं, मनुष्यों, नागों, पशुओं, पक्षियों और संसार के अन्य सभी प्राणियों को पवित्र नामों के कीर्तन के अमृत में डुबो दिया। उन्होंने सबको आध्यात्मिक प्रेम के आनन्द की अमृत-धारा दी, वह धारा जो सारे वेदों की सर्वश्रेष्ठ वस्तु है। उन्होंने किसी की उपेक्षा नहीं की।

त्रि-भुबन मङ्गल नाम-प्रेम-बले दूर गेल कलि आन्धियार शमन-भबन-पथ सबे एक रोधल बञ्चित रामानन्द दुराचार
अर्थ

तब तीनों लोक मंगलमय हो गए। तब पवित्र नाम के प्रेम की शक्ति ने कलियुग के अन्धकार को दूर भगा दिया। तब सब लोग महिमामय और शान्त आध्यात्मिक मार्ग पर चले। केवल दुराचारी रामानन्द उस मार्ग पर नहीं चला। केवल वही ठगा गया।

इस भजन के बारे में

रचयिता
रामानन्द
पद
4

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