Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

माघ सप्तमी शुक्ल पक्ष शुभ क्षण क्षण भूरि

माघ सप्तमी शुक्ल-पक्ष शुभ-क्षण क्षण भूरि प्रकट प्रभु अद्वैत सुन्दर कयल मलि-मद दूरि
अर्थ

माघ मास की शुक्ल सप्तमी के शुभ क्षण में सुन्दर और महिमामय अद्वैत आचार्य इस जगत में प्रकट हुए। उसी क्षण कलियुग का घमंड दूर हो गया।

धा-इ चलु सब लोक पेठि कुबेर-भबन मझार बिपुल पुलक निरखि बालक देत जय जय कार
अर्थ

सब लोग दौड़कर कुबेर पण्डित के घर पहुँचे। नवजात शिशु को देखकर उनके शरीर के रोम हर्ष से पुलकित हो गए। वे "जय! जय!" पुकार उठे।

भाट-गण घन भणत यश गायत गुणी मुद-माति सुघड बादक-बृन्द बायत बाद्य कत कत भान्ति
अर्थ

कवियों ने शिशु की महिमा का गान किया। वे आनन्द में उन्मत्त हो गए। वादकों ने अपने वाद्यों पर कितनी ही सुरम्य धुनें बजाईं।

करत नर्तक नृत्य उघटत थैता तक तक थोन दास नरहरि पहुंक जनम बिलस बरणब कोन
अर्थ

नर्तक नाच रहे थे और उनके नृत्य से थैता तक तक थोना! के बोल गूँज रहे थे। इस प्रकार नरहरि दास अद्वैत आचार्य की महिमामय जन्म-लीला का कुछ वर्णन करते हैं।

इस भजन के बारे में

पद
4