Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कुबेर पण्डित अति करषित

कुबेर पण्डित अति करषित देखिया पुत्रेर मुख करि जात-कर्म ये आछिल धर्म बाडये मनेर सुख
अर्थ

नवजात पुत्र का मुख देखकर कुबेर पण्डित अत्यन्त प्रसन्न हुए। जैसे-जैसे वे जातकर्म आदि धर्मविधियाँ करते गए, उनके हृदय का आनन्द बढ़ता गया।

सब सु-लक्षण बरण काञ्चन कनक-कमल-शोभा आजानु-लम्बित बाहु सु-बलित जग-जन-मनो-लोभा
अर्थ

उस पुत्र में सभी शुभ लक्षण थे। उनका वर्ण स्वर्ण के समान था। वे सुवर्ण-कमल के समान शोभायमान थे। उनकी सुन्दर भुजाएँ घुटनों तक पहुँचती थीं। संसार के लोगों के हृदय उन्हें पाने के लिए तरसते थे।

नाभि सु-गभीर परम सुन्दर नयन कमल जिनि अरुण चरण नाम दरपण जिनि कत बिधुमणि
अर्थ

उनकी नाभि बहुत गहरी थी। वे परम सुन्दर थे। उनके नेत्रों ने कमल के फूलों को भी हरा दिया। उनके लाल चरणों ने कितने ही दर्पणों और चन्द्रकान्त मणियों को भी हरा दिया।

महा-पुरुषेर चिह्न मनोहर देखिया बिस्मित सबे बुझि इह हैते जगत तारिबे ए-इ करे अनुभबे
अर्थ

महापुरुष के मनोहर लक्षणों को देखकर सभी आश्चर्यचकित हो गए। हर कोई सोचने लगा, "यह बालक समस्त लोकों का उद्धार करेगा।"

यत पुर-नारी शिशु-मुख हेरि आनन्द-सागरे भासे ना धरये हिया पुन पुन गिया निरखये अनिमिषे
अर्थ

नवजात शिशु का मुख देखकर गाँव की स्त्रियाँ आनन्द-सागर में तैरने लगीं। उनका हृदय शान्त नहीं रहता था। वे बार-बार आकर देखती थीं। वे बिना पलक झपकाए निहारती रहती थीं।

ताहार मातारे कारे परिहारे कहे हेन सुत यार तार भाग्य-सीमा कि दिब उपमा भुबने के सम तार
अर्थ

माता की अनुपस्थिति में स्त्रियाँ आपस में कहती थीं, "ऐसा पुत्र पाकर वह माता सौभाग्य के शिखर पर पहुँच गई हैं। हम उनकी तुलना किससे करें? इस संसार में उनके समान और कौन है?"

एतेके बचन सब नारी-गण कहे गद गद भाष जगत-तारण बुझल कारण दास बैष्णबेर आश
अर्थ

भाव-विभोर होकर गद्गद वाणी में सब स्त्रियाँ इस प्रकार कहती थीं। वे जानती थीं कि यह बालक समस्त लोकों का उद्धार करेगा। वैष्णव दास अद्वैत प्रभु का संग पाने की आकांक्षा रखते हैं।

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पद
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