Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
माघे शुक्ला-तिथि सप्तमीते अति उथलये महा आनन्द-सिन्धु नाभा गर्भ धन्य करि अबतीर्ण हैल शुभा-क्षणे अद्वैत-इन्दु
अर्थ

माघ मास की शुक्ल सप्तमी को आनन्द का महासागर उमड़ पड़ा। जब सभी नक्षत्र शुभ थे, उस शुभ क्षण में अद्वैतचन्द्र प्रभु इस जगत में अवतरित हुए और नाभा देवी के गर्भ से जन्म लिया।

कुबेर पण्डित हैया हरषित नाना दान द्विज दरिद्रे दिया सूतिका-मद्निरे गिया धीरे धीरे देखि पुत्र-मुख जुडाय हिया
अर्थ

अत्यन्त हर्षित होकर कुबेर पण्डित ने निर्धन ब्राह्मणों को अनेक प्रकार के दान दिए। फिर वे धीरे-धीरे सूतिकागृह की ओर गए। पुत्र का मुख देखकर उनका हृदय शीतल आनन्द से भर गया।

नबग्राम-बासी लोक धाञा असि परस्पर कहे ना देखि हेन किबा पुण्य-काले मिश्र बृद्ध-काले पा-इलेन पुत्र-रतन मेन
अर्थ

नवद्वीप के सभी लोग वहाँ दौड़कर आए। वे आपस में कहते थे, "हमने ऐसा बालक कभी नहीं देखा। इस पुण्य घड़ी में कुबेर पण्डित ने बुढ़ापे में पुत्र-रत्न पाया है।"

पुष्प-बरिषण करे सुर-गण अलखित रीति उपमा नहु जय जय ध्वनि भरल अबनी भणे घनश्याम मङ्गल बहु
अर्थ

देवताओं ने फूलों की वर्षा की। शिशु अद्वैतचन्द्र की महिमा जैसी महिमा किसी ने कभी नहीं देखी। उनकी महिमा का कोई सानी नहीं है। सारा जगत "जय! जय!" की ध्वनि से भर गया। घनश्याम दास इन शुभ लीलाओं का वर्णन करते हैं।