नाचे नित्यानन्द भुबन आनन्द
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संसार के आनंद, नित्यानन्द प्रभु नृत्य करते हैं। वृन्दावन की महिमा सुनकर वे अपनी बाहें ऊँची उठाते हैं। बादल की तरह गरजते हुए वे 'हरि!' कहते हैं। उनकी सुंदर चाल मनमोहक है।
उनके वचन सुंदर और मधुर हैं। गदाधर, माधव, गौरीदास, मुकुंद और श्रीवास को देखकर, और यह जानकर कि अब उपयुक्त अवसर आ गया है, वे गाना आरंभ कर देते हैं।
नित्यानन्दचन्द्र प्रभु नृत्य करते हैं। प्रेमोल्लास से अभिभूत होकर वे रुँधे स्वर में टूटे-टूटे शब्द बोलते हैं। गदाधर का हाथ पकड़कर वे आधे-आधे पग चलते हैं।
उनका मुख चंद्रमा के समान है। वे बार-बार हँसते हैं। उनकी आँखें सुंदर और लालिमा युक्त हैं। उनकी छाती पर एक फूल-माला झूमती है। उनके सखा आनंद से भर जाते हैं।
उनके लालिमायुक्त चरणों में पायल बजती है। उनके आनंद का कोई अंत नहीं है। श्रीनिवास के पुत्र गीत-गोविंद दास अब अपने हृदय में आनंद से अभिभूत हैं।