Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

निशि परभात समये किये पेखलुं, रसम्यअ गौर किशोर

निशि परभात समये किये पेखलुं, रसम्यअ गौर-किशोर कुङ्कुम चन्दन, अङ्गहि धूसर, भूषण परम उजोर
अर्थ

भोर के समय मैंने मनोहर भगवान गौरकिशोर को देखा। उनके अंग चन्दन और कुंकुम से लिप्त थे, और उनके आभूषण चमक रहे थे।

रस भरे रजनी जागि करु कीर्तन, नर्तन निशि करु भोर पुलकाबली ललित तनु-माधुरी, चातुरि चरित उजोर
अर्थ

उन्होंने सारी रात कीर्तन किया था। सारी रात वे दिव्य प्रेम के आवेश में नृत्य करते रहे। उनके सुन्दर शरीर के रोम खड़े हो गए थे। उनकी लीलाएँ उज्ज्वल थीं।

निन्दहि लोले लोल-दिठि लोचन, तहि अति अरुण भेल पुलके पिरीत पुन उठ-इ, ईषत् हासि पुन गेल
अर्थ

उनकी लाल आँखें चंचल थीं। पलक झपकते ही उनके भीतर दिव्य प्रेम का भाव उमड़ आया। वे हल्का-सा मुस्कुराए।

गौर-चरित रीत कि कहब सम्प्रीत, बुझ-इते बुझ-इ ना पारि मनमथ भण, कलि दलन दयार्णब, दुर्लभ नदीया-बिहारी
अर्थ

भगवान गौर की लीलाओं के सत्य का वर्णन कौन कर सकता है? उन्हें समझने की शक्ति मुझमें नहीं है। मनमथ कहते हैं, भगवान गौर, जिन्हें पाना अत्यन्त कठिन है, अब नदिया में लीला-विहार करते हैं। वे दया के सागर हैं, और अब अपने चरणों के नीचे कलियुग के पापों को कुचलते हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
मन्मथ दास
पद
4