Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
1 टेक
निता-इ-चान्देर गुण कि कहब आर एमन दयाल निधि कभु नाहि होयल कभु नाहि होयब आर
अर्थ

निताईचन्द्र की महिमा का और क्या वर्णन करूं। वे करुणा के सागर हैं। ऐसा दयालु न कभी हुआ है, न कभी होगा।

मूढ पाषण्डी छिल जगा-इ माधा-इ दुहुं कान्धा फेलि मारिल कपाले रुदिरे बहिल नदी दु-बाहु पसारि तमु पहुं दोहे कलयहि कोले
अर्थ

जगाई और माधाई नामक दो मूर्ख पाषण्डियों ने ठीकरा फेंककर निताई के माथे पर मारा और खून की धारा बहा दी। फिर भी निताई ने अपनी दोनों बाहें फैलाकर मारने वाले उन दोनों को छाती से लगा लिया।

गोलोके दुलह धन आ-चाण्डाले बितरण जाति कुल ना करत बिचार मुखे हरि हरि बलि नाचिया नाचिया चले दु-नयने बहे जल-धार
अर्थ

निताई ने गोलोक के दुर्लभ धन को उदारतापूर्वक बांट दिया, चाण्डालों तक को भी दिया। उन्होंने किसी की जाति-कुल का विचार नहीं किया। मुख से 'हरि हरि' कहते हुए वे नाचते-नाचते चलते रहे, उनकी दोनों आंखों से आंसुओं की धारा बहती रही।

आपहि मातल जगत माता-ओल खेने कान्दे खेने मृदु हास आपन प्रेमे भोरा निता-इ मातो-यारा कि बुझब पामर दीन हरि-दास
अर्थ

वे स्वयं उन्मत्त हो गए और सारे जगत को भी उन्मत्त कर दिया। एक क्षण वे रोते, दूसरे क्षण मधुर मुस्कान भरकर हंसते। निताई प्रेमानन्द में इस प्रकार उन्मत्त हो गए, तो यह दीन पतित हरिदास उन्हें कैसे समझ सकता है?