Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

निता इ करुणामय अबतार

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निता-इ करुणामय अबतार देखिया दीन-हीन करये प्रेम-दान आगम निगमेर सार
अर्थ

करुणामय निताई प्रभु इस संसार में अवतरित हुए हैं। दीन और पतित लोगों को देखकर उन्होंने उन्हें प्रेम का महान धन दिया, वह धन जो आगम और निगम शास्त्रों का सार है।

सहजे ढल ढल सकल निरमल कमल जिनिया आङ्खि-शोभा बदन-मण्डल कोटि-शशधर जिनिया जग-मन-लोभा
अर्थ

उनकी सुंदर आँखों से, जो कमल के फूलों को भी हरा देती हैं, आँसू बहते हैं। उनके मुखमंडल की शोभा करोड़ों चंद्रमाओं को भी हरा देती है। इस संसार के हृदय उन्हें पाने के लिए तरसते हैं।

अङ्ग सुचिक्कण मदन-मोहन कण्ठे शोभे मणि-हार बचन-रचन श्रब.ने दूरे गेल पातकी-मन-आन्धियार
अर्थ

उनके सुन्दर अंग कामदेव को भी मोहित कर लेते हैं। उनके गले में रत्नों की सुन्दर माला शोभा पाती है। वे पाप भरी बातों के अन्धकार को अपने कानों से दूर रखते हैं।

नबीन करि-कर जिनिया भुज-बर ताहे शोभे हेम-दण्ड हेरिया सब लोक पासरे दुख-शोक खण्डये हृदय पाषण्ड
अर्थ

अपनी सुंदर बाहों में, जो युवा हाथी की सूंड को भी हरा देती हैं, वे एक सुनहरा दंड धारण करते हैं। लोग जब उन्हें देखते हैं, तो अपने सारे दुःख-क्लेश भूल जाते हैं। उनके पथरीले हृदय टुकड़े-टुकड़े होकर टूट जाते हैं।

निता-इर करुणाय अबनी भासल पूरल जग-मन-आश ए प्रेम लब लेश परश ना पा-इया कान्दये हरिराम दास
अर्थ

करुणामय निताई प्रभु ने संपूर्ण संसार को प्रेम की बाढ़ में डुबो दिया। इस प्रकार उन्होंने इस संसार के हर हृदय की कामना पूर्ण कर दी। उस प्रेम-बाढ़ की एक बूँद भी न पाकर हरिराम दास रो पड़ते हैं।

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