निता इ करुणामय अबतार
करुणामय निताई प्रभु इस संसार में अवतरित हुए हैं। दीन और पतित लोगों को देखकर उन्होंने उन्हें प्रेम का महान धन दिया, वह धन जो आगम और निगम शास्त्रों का सार है।
उनकी सुंदर आँखों से, जो कमल के फूलों को भी हरा देती हैं, आँसू बहते हैं। उनके मुखमंडल की शोभा करोड़ों चंद्रमाओं को भी हरा देती है। इस संसार के हृदय उन्हें पाने के लिए तरसते हैं।
उनके सुन्दर अंग कामदेव को भी मोहित कर लेते हैं। उनके गले में रत्नों की सुन्दर माला शोभा पाती है। वे पाप भरी बातों के अन्धकार को अपने कानों से दूर रखते हैं।
अपनी सुंदर बाहों में, जो युवा हाथी की सूंड को भी हरा देती हैं, वे एक सुनहरा दंड धारण करते हैं। लोग जब उन्हें देखते हैं, तो अपने सारे दुःख-क्लेश भूल जाते हैं। उनके पथरीले हृदय टुकड़े-टुकड़े होकर टूट जाते हैं।
करुणामय निताई प्रभु ने संपूर्ण संसार को प्रेम की बाढ़ में डुबो दिया। इस प्रकार उन्होंने इस संसार के हर हृदय की कामना पूर्ण कर दी। उस प्रेम-बाढ़ की एक बूँद भी न पाकर हरिराम दास रो पड़ते हैं।