Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

फाल्गुन पूर्णिमा निशि शची अङ्काकासे आसि

फाल्गुन-पूर्णिमा निशि शची-अङ्काकासे आसि गौरचन्द्र ह-इल उदय से शशीर सहचर भक्त-तारका-निकर चारि-दिके प्रकाशित हय
अर्थ

फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात को शची की गोद के आकाश में भगवान गौर का चन्द्रमा उदित हुआ। उस चन्द्रमा के चारों ओर भक्तों के तारे चमकने लगे।

पाप घोर अन्धकार सर्बत्र छिल बिस्तार बिधूदये प्रस्थान करिल जीबेर भाग्य कुमुद हरि शशी मनो-मद प्रेमानन्दे हासिते लागिल
अर्थ

उस चन्द्रमा के उदित होने पर पाप का भयानक, सर्वव्यापी अन्धकार बहुत दूर भगा दिया गया। उस चन्द्रमा को देखकर लोगों के सौभाग्य के कमल दिव्य प्रेम से खिल उठे। उनके हृदय आनन्द से मतवाले हो गए।

पाप अमा-निशि भोर हरिषे भक्त-चकोर तुलिल आनन्द कोलाहल प्रेम-कौमुदीर सुधा पीये दूर कैल क्षुधा सबा-इ ह-इल सु-शीतल
अर्थ

पापों की अमावस्या की रात से बहुत समय तक व्याकुल रहे भक्तों के चकोर पक्षियों ने अब आनन्द का कोलाहल मचा दिया। उस अमृत-चाँदनी को पीकर उन पक्षियों की भूख दूर भाग गई। सब शीतल आनन्द से भर गए।

से प्रेम-सुधार कणा पाञा तृप्त सर्ब-जन जीब-कुल भेल आनन्दित आपन करम दोषे न पा-इया नब लेशे प्रेम-दास धूलाय लुण्ठित
अर्थ

दिव्य प्रेम की उस अमृत-चाँदनी को पीकर जीव आनन्द से भर गए। अपने पिछले बुरे कर्मों के कारण प्रेम दास ने उस अमृत-चाँदनी की एक किरण भी नहीं पी। इसी कारण वे अब धूल में लोट रहे हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
प्रेम दास
पद
4