Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
प्रभु नित्यानन्द आनन्देर कन्द पूरुबे रोहिणी-तनय येंहो कलि धन्य कैल शुभ-क्षणे हैल पद्माबती-गर्भे प्रकट तेंहो
अर्थ

भगवान नित्यानन्द संपूर्ण आनंद के मूल हैं। पूर्व में वे रोहिणी के पुत्र बलराम थे। अब शुभ मुहूर्त में पद्मावती के गर्भ से जन्म लेकर वे कलियुग को परम शुभ बना देते हैं।

जय जय जय ध्वनि अतिशय हारा-इ पण्डितेर घरे एकचक्र-बासी लोक सुखे भासि धाञा आसे धृति धरिते नारे
अर्थ

'जय! जय! जय!' की गूँज हाड़ाई पण्डित के घर को भर देती है। आनन्द में तैरते हुए दौड़ते एकचक्र के लोग शान्त और स्थिर नहीं रह पाते।

सूतिका-मन्दिरे झलमल करे निता-इर मुख चन्द्रमा चारु से शोभा देखिते कत साध चिते देखे आङ्खे ना-इ निमिख करु
अर्थ

बालक नित्यानन्द के सुन्दर चन्द्रमुख से सूतिका-गृह शोभामय प्रकाश से भर जाता है। उनकी सुन्दर शोभा देखने की कितनी ही इच्छाएँ लोगों के मन में उठती हैं! वे बिना पलक झपकाए उन्हें निहारते रहते हैं।

हर्षे देब-गण बर्षे पुष्प घन अलखित नृत्य भङ्गिमा भाले घनश्याम गाय नाना बाद्य-बाय धा धा धिउकि धिकि धेन्या ना ताले
अर्थ

देवगण आनंद से पुष्पों की वर्षा करते हैं। अदृश्य रूप से वे सुंदर भाव-भंगिमा में नाचते हैं। जब वाद्य और मृदंग ध्वनि करते हैं, धा धा धिउकी धिकी धेन्या ना, तब घनश्याम यह गीत गाते हैं।