Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
रूपे गुणे अनुपम लक्ष कोटि मनोरमा ब्रज-बधू अयुते अयुते रास-केलि रस रङ्गे बिहरे याहार सङ्गे सो एबे कि लागि अबधूत
अर्थ

पहले वे अनुपम रूप-गुण वाली, मनमोहक लाखों-करोड़ों व्रज-वधुओं के साथ रास-केलि के रस में विहार करते थे, अब वे अवधूत बनकर क्यों घूम रहे हैं?

2 टेक
हरि हरि ए दुख कहब कार आगे सकल नागर गुरु रसेर कलप-तरु केने निता-इ फिरेन बैरागे
अर्थ

हाय! हाय! यह दुःख मैं किससे कहूँ? जो पहले सभी रसिक नायकों के गुरु थे और जो रस के कल्पतरु हैं, वे निताई अब संन्यासी बनकर वैराग्य में क्यों भटक रहे हैं?

सङ्कर्षण शेष यार अंशा-कला अबतार अनुक्षण गोलोके बिराजे शिब बिहि अगोचर आगम निगम पर केने निता-इ सङ्कीर्तन माझे
अर्थ

जिनके अंश और कला अवतार शेष और संकर्षण हैं, जो सदा गोलोक में विराजमान रहते हैं, जो शिव और ब्रह्मा की दृष्टि से भी परे हैं, जो आगम-निगम शास्त्रों की भी सीमा से परे हैं, वे निताई संकीर्तन में क्यों रत हैं?

कृष्णेर अग्रज नाम महाप्रभु बलराम कलि-युगे श्री-नित्यानन्द गौर-रसे निमगन करा-इल जग-जन दूरे रहु बलराम मन्द
अर्थ

कृष्ण के बड़े भाई का नाम महाप्रभु बलराम था, कलियुग में वे ही श्री नित्यानन्द हुए। उन्होंने संसार के लोगों को गौर-प्रेम के रस में डुबा दिया है। हा! केवल बलरामदास दूर ही रह गए, मूर्ख बलरामदास उस रस से वंचित रह गए।