शचीर दुलाल मनो रङ्गे
मन में आनन्द भरे हुए शची के नन्हे पुत्र दूसरे बालकों के साथ खेलते हैं।
चारों ओर दूसरे बालकों से घिरे हुए बालक गौर नृत्य करते हैं। वे धीरे-धीरे, मन्द-मन्द हँसते हैं।
हाथ में हाथ पकड़कर बालक गीत की ताल पर नाचते हैं।
एक क्षण तालियाँ बजती हैं। अगले ही क्षण “वाह! वाह!” की पुकारें उठती हैं।
बालक गौर गाते हैं, “हरि! हरि!” दूसरे बालक भी गाते हैं, “हरि!”
बालकों को “हरिबोल!” गाते सुनकर कलियुग काँप उठता है। वह जान लेता है कि उस पर विपत्ति आने वाली है।
मुरारि आनन्द से भर उठे हैं। अब पापों का राजा दूर भाग जाता है।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- मुरारि
- पद
- 7