शान्तिपुर पति परम सुन्दर
अद्वैत प्रभु शान्तिपुर के स्वामी हैं। वे परम सुन्दर और गौरवशाली हैं। उनकी लीलाएँ भव्य हैं। उनके शरीर के रोम पुलकित हो उठते हैं। वे क्षण-क्षण प्रेम की उमंग से अभिभूत रहते हैं।
भयंकर गर्जना करते हुए वे शक्तिशाली कलियुग के अभिमान को चूर-चूर कर देते हैं। 'गौर-हरि! हरि!' कहते हुए वे कांपते हैं। वे अपने साथियों को गले लगाते हैं।
वे भूमि पर गिर पड़ते हैं। उनका अनुपम शरीर धूल से ढक जाता है। उनके कमल-नेत्रों से अश्रु बहते हैं, जैसे वर्षा के बादलों से मूसलाधार वर्षा हो रही हो।
लोगों को दीन, पतित और दुःखी देखकर वे कृपापूर्वक समस्त लोकों में आध्यात्मिक सत्य का प्रचार करते हैं। नरहरि दास परम उदार और गौरवशाली अद्वैत प्रभु की शरण लेते हैं।