Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
शान्तिपुर-पति परम सुन्दर चरित बर लीला यात भाब-भरे अति मत्त अनुखन बिपुल पुलकित गात
अर्थ

अद्वैत प्रभु शान्तिपुर के स्वामी हैं। वे परम सुन्दर और गौरवशाली हैं। उनकी लीलाएँ भव्य हैं। उनके शरीर के रोम पुलकित हो उठते हैं। वे क्षण-क्षण प्रेम की उमंग से अभिभूत रहते हैं।

प्रबल कलि-मद दमन घन घन घोर गरजि बिभोर गौर-हरि हरि भणत कम्प-इ गिरत सहचर कोर
अर्थ

भयंकर गर्जना करते हुए वे शक्तिशाली कलियुग के अभिमान को चूर-चूर कर देते हैं। 'गौर-हरि! हरि!' कहते हुए वे कांपते हैं। वे अपने साथियों को गले लगाते हैं।

अबन्नी घन गडि यत निरुपम धूलि-धूसर देह कञ्ज लोचन झर-इ झर झर जनु स शाँअन मेह
अर्थ

वे भूमि पर गिर पड़ते हैं। उनका अनुपम शरीर धूल से ढक जाता है। उनके कमल-नेत्रों से अश्रु बहते हैं, जैसे वर्षा के बादलों से मूसलाधार वर्षा हो रही हो।

दीन दुखित नेहारि करु करुणा भुबने परचार दास नरहरि पहुंक बलि बलिहरि परम उदार
अर्थ

लोगों को दीन, पतित और दुःखी देखकर वे कृपापूर्वक समस्त लोकों में आध्यात्मिक सत्य का प्रचार करते हैं। नरहरि दास परम उदार और गौरवशाली अद्वैत प्रभु की शरण लेते हैं।