- पद 3भजनसङ्गे बिलसित यार राधा चन्द्राबली आर
कत शत बरज-किशोरी
एबे पहुं बुक बुक न देखेन नारी-मुख
कि लागि सन्न्यासी दण्ड-धारी
“जय राधा माधव” के परिणाम
536 भजन · 902 पद भजन के शब्दों में · 608 पद अर्थ में
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1 पद भजन में
1 पद भजन में
- पद 2भजनजय जय निता-इ गौर अबतार
हरि-नाम प्रबल तरणी अबलम्बये
करुणाय करल उद्धार
1 पद भजन में
- पद 13भजनकेबा बा ना निछये जीबन
जय-ध्वनि करे सर्ब-जन
1 पद भजन में
- पद 6भजनहाहाकार करि भुज-युग तुलि
बले हरि हरि बोल
राधा राधा बलि कान्दे उच्च करि
रहि गदाधर कोल
1 पद भजन में
- पद 2भजनजय शची-नन्दन त्रि-भुबन-बन्दन
कलि-युग-काल-भुजग-भय-खण्डन
1 पद भजन में
- पद 2भजनजय जय भुबन-मङ्गल अबतार
कलि-युग बारण मद-बिनिबारण
हरि-ध्वनि जगत-बिथार
1 पद भजन में
- पद 3भजनजय शची-नन्दन त्रि-भुबन-बन्दन
पूर्ण पूर्ण अबतार
जग-अनुरण्जन भब-भय-भण्जन
सङ्कीर्तन परचार
1 पद भजन में
- पद 3भजनशङ्ख दुन्दुभि बाजे परम हरिषे
जय-ध्वनि सुर-गुल कुसुम बरिषे
1 पद भजन में
- पद 3भजननीप-तरु-मूले गिया अधरे मुरली लैय
राधा-नाम करित साधन
एबे सुरधुनी-तीरे बाहु दुटी उच्च क'रे
सदा-इ करये सङ्कीर्तन
1 पद भजन में
- पद 3भजनशङ्ख घण्टा काशि बेणु बीणा बंशी
खोल करताल बाय
जय जय रोल हरि हरि बोल
चौदिगे भकत गाय
1 पद भजन में
- पद 3भजनहोत जय जय-कार जग-भरि धिरज धरत ना को-इ
मिश्र-भबने प्रबेशि शिशु अबलोकि उनमत हो-इ
1 पद भजन में
- पद 5भजनरचिया करतालि हासिया नाचे भालि
ता देखि देबे गोप-बेश-धारी
नाचये आङ्गिनाते के बा ना नाचे ताते
सघने जय जय-ध्वनि करि
1 पद भजन में
- पद 4भजनदेब-गण-मन-मगन अतिशय निरखि ललित बिलास
भुबन भरि जय जय-ध्वनि निछनि नरहरि दास
1 पद भजन में
- पद 11भजनकेबा ना बलये भाल भाल
जग-भरि जय जय शबद रसाल
1 पद भजन में
- पद 2भजनचलत बल्लभ भबन भूसुर, बेडि गति अति मन्द सु-मधुर,
बन्दी-गन, भुरि मङ्गल-भण, भुबन-भरु जय जय ध्वनि.
नटत नट-गण उघटि थैतत, थोङ्ग थोङ्गिन गान रत कत,
बिरचि रुचिर चरित्र सुर साञ, सरस रस बरषत गुणी.
1 पद भजन में
- पद 19भजनदेब-गण बिमाने चडिया
बरिषे कुसुम अलखित जय दिया
1 पद भजन में
- पद 4भजनबेद उचरत बिप्र-गण गुण बन्दी करु परकाश
भुबन भरि जय जय कि नरहरि भबन पहुं बिलास
1 पद भजन में
- पद 15भजनजय जय ध्वनि अनिबार
बादाबादि बय बाद्य बादक दोँहार
1 पद भजन में
- पद 2भजनभीड अतिशय गगन पथे बहु रोकि देब बिमान
होत जय जय शबद सु-मधुर भङ्गी भण-इ न जान
1 पद भजन में
- पद 2भजनहोत जय जय शब्द अबिरत, नारी पुरुख असङ्ख्य निरखत
परस्पर भण लखिमी लखिमीक-नाथ दुँहु बिलसत जनु
बन्दी-गण मन मोद अतिशय, उचरित नब नब चरित मधुमय
भूरि भूसुर करत घन घन, बेद-ध्वनि पुलकित तनु