अद्वैत घरणी सीता ठाकुराणी केबल रसेर राशि
अद्वैत-घरणी सीता ठाकुराणी केबल रसेर राशि
नरहरि दास इस संग्रह के 57 भजनों के रचयिता हैं, जो इन ग्रन्थों से लिए गए हैं: गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन।
57 भजन · पृष्ठ 1 / 2
अद्वैत-घरणी सीता ठाकुराणी केबल रसेर राशि
अधिबास निशि पोहा-इले
अनुपम गोर अबतार
आजि आङ्गिन पर नदीया बालक साञे
आजु कत ना आनन्द मने
आजु कि आनन्द श्री-शची-भुबने रजनी-प्रभात-काले
आजु गो-धूलि समय शुभ-क्षण, गौर गुण मणि भुबन मोहन,
आजु शुभ-क्षणे पोहा-इल निशि
आजु स्नेहेते बिह्वोल हैया
आहा मरि मरि गौराङ्गचान्देर चरिते केब न झुरे
आहा मरि मरि सुर-नारी-गण, नदीया-चान्देर बिबाह देखि
कि आनन्द नदीया-नगरे
कि आनन्द शचीर भबने
किबा श्री-शची-भबन माझे
गोरा गुण-मणि प्राण प्रिया-सह बिलसये शोज बासर घरे
गोरा गुण-मणि सुघड शेखर परम मुदित हियाय
गोरा बिधु अधिबास सुखे केना बैसे प्रबेशिया भुबन माझे
गोरा मोर शुधा-इ काँचा सोना
गोराचन्देर बिबाह पर-दिने
गोराचान्द बिबाह करिया
गौर गोकुल-चन्द्र चलु निज गेहे निशि परभात
गौरचन्देर बिबाह देखिबारे
गौरसुन्दर परम शुभ-क्षणे धरल यज्णोपबीत
गौराङ्ग के जाने महिमा तोमार
गौराङ्ग नहिते तबे कि ह-इते
जगन्नाथ मिश्र महा-सुखे
जय जय जय मङ्गल-रब, फाल्गुन-पूर्णिमा-निशि नब शोभित
देखि पहुङ्क बिबाह माधुरी को-इ धर-इ ना थेह
देब देब-रमणी उल्लासे
देब-रमणी-बृन्द बिरचि बेश बिबिध भान्ति
नदीया-नगरे हैल ध्वनि
नदीयार अति पुण्यबती पति
नदीयार नारी पुरुष सुकृति मानि
नाचत भुबन-मोहन चम्पक कनक कण्ज जिनि बरण
नाचे आरे बाप बिश्वम्भर
निमा-इ चञ्चल खेपा किछु-इ ना माने गो शुन एक दिबसेर कथा
निशि परभात समये ये-रूप आनन्द शचीर घरे
परम शुभ शची-गभे बिलसत गौर गोकुल नाह
पाशरा ना याय आमार गौरचान्देर लीला
फाल्गुन-पूर्णिमा मङ्गलेर सीमा
बरज-भूषण-गौर-बिधु-बर, करि बिबाह बिनोद-गति पर
बल्लभ-दुहिता लक्ष्मी सु-चरिता
बल्लभ भबने गौर राय
बिबाह करिया बिश्वम्भर
बेश बना-इया सहचरे
भुबन-मनो-चोरा गोकुल-पति गोरा
रङ्गे नाचये शचीर बाला
रजनी-प्रभाते शची-देबी चिते आनन्देर नाहि ओर