श्री अनुराग वल्ली
हे भगवान, मुझे एक साथ करोड़ों शरीर और प्रत्येक शरीर में करोड़ों मुख प्रदान कीजिए। अपनी कृपा से प्रत्येक मुख में करोड़ों जिह्वाएँ रख दीजिए। हे नाथ, उन जिह्वाओं पर आपके करोड़ों दिव्य गुण नृत्य करते रहें।
उस आत्मा से क्या लाभ, जिसके करोड़ों शरीर न हों? उस शरीर से क्या लाभ, जिसके करोड़ों मुख न हों? उस मुख से क्या लाभ, जिसकी करोड़ों जिह्वाएँ न हों? और उस जिह्वा से क्या लाभ, जो आपके करोड़ों नामों का कीर्तन न करे?
हे नाथ, मुझे सदा सैकड़ों शरीर मिलें, और प्रत्येक शरीर में हजारों मुख हों। प्रत्येक मुख में सदा लाखों जिह्वाएँ शोभित रहें, और प्रत्येक जिह्वा आपके करोड़ों पवित्र नामों का कीर्तन करे।
हे माधव, जब भी, जहाँ भी, और जो कोई भी आपके नामों और लीलाओं का गान करे, वहाँ मैं करोड़ों कानों से नित्य आपके उस अमृत का पान करता रहूँ।
हे भगवान, मुझे करोड़ों कान और करोड़ों-करोड़ों जिह्वाएँ मिलें। तब मैं सदा आनन्द से आपकी लीलाएँ सुनता और गाता रहूँगा।
मुझे करोड़ों कान, करोड़ों नेत्र, करोड़ों हृदय-मन और करोड़ों जिह्वाएँ प्राप्त हों, जिससे आपके सौन्दर्य के सागर को सुनकर, देखकर और आलिंगन में लेकर मैं उसकी मधुरता का पान कर सकूँ।
मुझे करोड़ों नेत्र, कान, नासिकाएँ, जिह्वाएँ और वक्षस्थल प्राप्त हों, जिससे मैं निरन्तर आपके सौन्दर्य, मधुर स्वर, सुगन्ध और आलिंगन के रस का आस्वादन कर सकूँ।
मुझे आपके समीप जाने के लिए करोड़ों चरण प्राप्त हों। आपकी सेवा करने के लिए करोड़ों हाथ प्राप्त हों। उस सेवा को सिखाने के लिए करोड़ों बुद्धियाँ प्राप्त हों। हे भगवान, कृपया मुझे ये वर प्रदान कीजिए।