Vaishnava Songs
भजन-ग्रन्थ

स्तवामृत-लहरी

स्तवामृत-लहरी में 19 भजन हैं।

स्तवामृत-लहरी, यानी स्तुति-अमृत की लहरें, अट्ठाईस संस्कृत अष्टकों का संग्रह है, यानी आठ श्लोकों वाले स्तव। इसके रचयिता विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर हैं, जो सत्रहवीं-अठारहवीं शताब्दी के एक प्रमुख गौड़ीय वैष्णव टीकाकार और आचार्य थे, और जिनकी संस्कृत रचनाएँ आज भी इस परम्परा के शास्त्र-अध्ययन की नींव हैं। उन अट्ठाईस में से उन्नीस स्तव यहाँ संकलित हैं। संग्रह में दो अलग धाराएँ चलती हैं। एक ओर गुरु-परम्परा की महिमा के अष्टक हैं: नरोत्तम दास ठाकुर, लोकनाथ गोस्वामी, और स्वयं श्री चैतन्य महाप्रभु, जिन्हें यहाँ शची-नन्दन, यानी शची के पुत्र, कहकर सम्बोधित किया गया है। दूसरी ओर वे अष्टक हैं जो छह गोस्वामियों द्वारा स्थापित और वृन्दावन के मन्दिरों में पूजित ऐतिहासिक विग्रहों को सीधे सम्बोधित हैं, जिनमें गोविन्ददेव, गोपीनाथदेव, मदन-गोपालदेव और गोकुलानन्द हैं। साथ में नन्दीश्वर और राधाकुण्ड जैसे पवित्र स्थलों के स्तव भी हैं। एक साथ पढ़ने पर यह संग्रह भक्ति के उन दो लक्ष्यों के बीच चलता है, जिन पर यह पूरी पदावली परम्परा बार-बार लौटती है: वे गुरु जिनके द्वारा भक्ति-साधना प्राप्त होती है, और वे विग्रह जिनमें वह साधना अपनी पूर्णता पाती है।

19 भजन