श्री गोपीनाथदेवाष्टक
उनके मुख पर मुस्कान है। उस मुस्कान में अमृत है। उस अमृत में बाँसुरी है, और उस बाँसुरी में संगीत का अमृत-सागर लहरा रहा है। गोपीनाथ उस सागर की तरंगों में गोपियों को डुबा देते हैं। वे विशाल वक्षस्थल वाले गोपीनाथ ही हमारे जीवन का लक्ष्य हैं।
उनके लाल मुकुट में मोती चमकते हैं और मोर-पंख लगे हैं। उस मोर-पंख के हिलने से वे हमारे हृदय और नेत्रों की वृत्तियों के रत्न चुरा लेते हैं। वे विशाल वक्षस्थल वाले गोपीनाथ ही हमारे जीवन का लक्ष्य हैं।
उनकी विशाल जंघाओं की कान्ति उनके पीत वस्त्र को आलिंगन में ले लेती है। उनकी कटि पर झलमलाती घंटिकाएँ सुशोभित हैं। एक गोपी उनके बायें कंधे को चूम लेती है। वे विशाल वक्षस्थल वाले गोपीनाथ ही हमारे जीवन का लक्ष्य हैं।
वे पीत वस्त्र धारण करते हैं। उनके गले में फूलों, स्वर्ण, रत्नों, मुक्ताओं और गुंजा की मालाएँ सुशोभित हैं। वे विशाल वक्षस्थल वाले गोपीनाथ ही हमारे जीवन का लक्ष्य हैं।
वे श्वेत मुकुट, श्वेत आभूषण और दो-तीन उज्ज्वल श्वेत मालाएँ धारण करते हैं। उनकी कीर्ति और पवित्रता उज्ज्वल और श्वेत है। प्रातः और सन्ध्या की मंगल आरतियों में वे हमारे हृदय को चूम लेते हैं। वे विशाल वक्षस्थल वाले गोपीनाथ ही हमारे जीवन का लक्ष्य हैं।
वे अत्यन्त सुन्दर हैं। वे श्रीवत्स, श्री, कौस्तुभ और भाव-विभोर रोमांच, इन चार चिह्नों से सुशोभित हैं। सौभाग्यशाली भक्त शुद्ध प्रेम से उनका दर्शन करते हैं। वे विशाल वक्षस्थल वाले गोपीनाथ ही हमारे जीवन का लक्ष्य हैं।
क्या वे स्वर्ण-बल्लरी से घिरा हुआ श्याम तमाल वृक्ष हैं? क्या वे दोनों ओर चमकती बिजली वाला श्याम मेघ हैं, या दो राधा-नक्षत्रों के मध्य श्याम चन्द्रमा हैं? वे विशाल वक्षस्थल वाले गोपीनाथ ही हमारे जीवन का लक्ष्य हैं। (टिप्पणी: सत्ताईस नक्षत्रों में से एक का नाम राधा है।)
वे शुद्ध प्रेम की साक्षात् मूर्तिमती गंगा हैं। वे निर्धनों और शरणहीनों पर कृपा करते हैं और उन्हें अपने प्रसाद के उन अमृत अवशेषों से पोषित करते हैं, जो देवताओं को भी सुलभ नहीं हैं। वे विशाल वक्षस्थल वाले गोपीनाथ ही हमारे जीवन का लक्ष्य हैं।
जो भक्त प्रसन्न मन से, गोपीनाथ के चरण-कमलों के प्रति प्रेम को ध्यान से पोषित करते हुए, इस “गोपीनाथाष्टक” का पाठ करता है, गोपीनाथ उसके करोड़ों पापों की ओर देखते ही नहीं। वे विशाल वक्षस्थल वाले गोपीनाथ ही हमारे जीवन का लक्ष्य हैं।