Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री जगन्मोहनाष्टक

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गुञ्जावली-वेष्टित-चित्र-पुष्प- चूडा-वलन्-मञ्जुल-नव्य-पिञ्छम् गोरोचना-चारु-तमाल-पत्रं वन्दे जगन्-मोहनम् इष्ट-देवम्
अर्थ

गुंजा और रंग-बिरंगे फूलों से गुंथे उनके मुकुट पर एक मोर-पंख हिलता रहता है। वे सुन्दर गोरोचन तिलक धारण करते हैं। मैं उन जगमोहन को प्रणाम करता हूँ, जो मेरे इष्टदेव हैं।

भ्रू-वल्गनोन्मादित-गोपनारी- कटाक्ष-बाणावलि-विद्ध-नेत्रम् नासाग्र-राजन्-मणि-चारु-मुक्तं वन्दे जगन्-मोहनम् इष्ट-देवम्
अर्थ

उनकी भौंहों के संचालन से उन्मत्त गोपियाँ अपनी तिरछी चितवन के बाणों से उनके नेत्रों को बेध देती हैं। उनकी नासिका के अग्रभाग पर एक सुन्दर रत्न और मुक्ता सुशोभित है। मैं उन जगमोहन को प्रणाम करता हूँ, जो मेरे इष्टदेव हैं।

आलोल-वक्रालक-कान्ति-चुम्बि- गण्ड-स्थल-प्रोन्नत-चारु-हास्यम् वाम-प्रगण्डोच्चल-कुण्डलान्तं वन्दे जगन्-मोहनम् इष्ट-देवम्
अर्थ

उनकी लहराती घुँघराली अलकों की कान्ति उनके कपोलों की सुन्दर मुस्कान को चूम लेती है। उनके झूलते कुण्डलों के अग्रभाग उनके सुन्दर कंधों को स्पर्श करते हैं। मैं उन जगमोहन को प्रणाम करता हूँ, जो मेरे इष्टदेव हैं।

बन्धूक-बिम्ब-द्युति-निन्दि-कुञ्चत्- प्रान्ताधर-भ्राजित-वेणु-वक्त्रम् किञ्चित्-तिरश्चीन-शिरोधिभातं वन्दे जगन्-मोहनम् इष्ट-देवम्
अर्थ

गर्दन को थोड़ा तिरछा किए वे अपने मुड़े हुए अधरों पर चमकती बाँसुरी रखते हैं। उनके वे अधर बिम्बफल और बन्धूक फूल की शोभा को भी लजा देते हैं। मैं उन जगमोहन को प्रणाम करता हूँ, जो मेरे इष्टदेव हैं।

अकुण्ठ-रेखा-त्रय-राजि-कण्ठ- खेलत्-स्वराली-श्रुति-राग-राजिम् वक्षः-स्फुरत्-कौस्तुभम् उन्नतांसं वन्दे जगन्-मोहनम् इष्ट-देवम्
अर्थ

उनकी सुन्दर गर्दन पर तीन रेखाएँ स्पष्ट झलकती हैं, जब वे कानों को भाने वाली मधुर रागिनियाँ गाते हैं। उनका वक्षस्थल चमकते कौस्तुभ मणि से सुशोभित है, और उनके कंधे विशाल हैं। मैं उन जगमोहन को प्रणाम करता हूँ, जो मेरे इष्टदेव हैं।

आजानु-राजद्-वलयाङ्गदाञ्चि- स्मरार्गलाकार-सुवृत्त-बाहुम् अनर्घ-मुक्ता-मणि-पुष्प-मालं वन्दे जगन्-मोहनम् इष्ट-देवम्
अर्थ

घुटनों तक पहुँचती, कंगन-बाजूबंद से सुशोभित उनकी सुन्दर मुड़ी हुई भुजाएँ कामदेव के विशाल अर्गलों के समान हैं। वे अमूल्य मुक्ताओं, रत्नों और फूलों की मालाओं से सुशोभित हैं। मैं उन जगमोहन को प्रणाम करता हूँ, जो मेरे इष्टदेव हैं।

श्वासैजद्-अश्वत्थ-दलाभ-तुन्द- मध्यस्थ-रोमावलि-रम्य-रेखम् पीताम्बरं मञ्जुल-किङ्किणीकं वन्दे जगन्-मोहनम् इष्ट-देवम्
अर्थ

एक सुन्दर रोमराजि से अंकित उनका उदर श्वास लेते समय पीपल के पत्ते के समान हिलता है। वे पीत वस्त्र धारण करते हैं, और उनकी पैंजनियाँ मधुर स्वर से बजती हैं। मैं उन जगमोहन को प्रणाम करता हूँ, जो मेरे इष्टदेव हैं।

व्यत्यस्त-पादं मणि-नूपुराढ्यं श्यामं त्रिभङ्गं सुर-शाखि-मूले श्री-राधया सार्धम् उदार-लीलं वन्दे जगन्-मोहनम् इष्ट-देवम्
अर्थ

रत्न-नूपुरों से सुशोभित, एक चरण दूसरे के पीछे रखे, श्याम वर्ण और त्रिभंगी रूप में वे कल्पवृक्ष के नीचे श्री राधा के साथ उदार लीला करते हैं। मैं उन जगमोहन को प्रणाम करता हूँ, जो मेरे इष्टदेव हैं।

श्रीमज्-जगन्-मोहन-देवम् एतत् पद्याष्टकेन स्मरतो जनस्य प्रेम भवेद् येन तद्-अङ्घ्रि-साक्षात्- सेवामृतेनैव निमज्जनं स्यात्
अर्थ

जो इन आठ श्लोकों का पाठ करके श्रीमान जगमोहन देव का स्मरण करता है, उसे शुद्ध भगवत्प्रेम प्राप्त हो, और वह भगवान के चरणों की साक्षात सेवा के अमृत में डूब जाए।