Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्रीबास अङ्गने बिनोद बन्धाने

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श्रीबास-अङ्गने बिनोद बन्धाने नाचे नित्यानन्द राय मनुज दैबत पुरुष योषित सबा-इ देखिते धाय
अर्थ

श्रीवास के सुन्दर आँगन में नित्यानन्द राय नाचते हैं। मनुष्य और देवता, स्त्री और पुरुष, सब उन्हें देखने दौड़ पड़ते हैं।

भकत-मण्डल गा-ओत मङ्गल बाजे खोल करताल माझे उनमत निता-इ नाचत भा-इयार भाबे मातोयार
अर्थ

भक्तों का मण्डल मंगल गीत गाता है। खोल और करताल बज रहे हैं। इनके बीच उन्मत्त निताई नाचते हैं। वे प्रेम के भाव में मतवाले हैं।

हेम-स्तम्भ-जिनि बाहु सुबलनि सिंह जिनि कटि-देश चन्द्र बदन कमल-नयन मदन-मोहन बेश
अर्थ

उनकी सुन्दर भुजाएँ सोने के खम्भों को भी हरा देती हैं। उनकी पतली कमर सिंह की कमर को भी हरा देती है। उनका मुख चन्द्रमा है, उनके नेत्र कमल हैं। उनका रूप कामदेव को भी मोहित कर देता है।

गरजे पुन पुन लम्फ घन घन मल्ल-बेश धरि नाच-इ अरुण-लोचने प्रेम-बरिखणे अबनी-मण्डल सिञ्च-इ
अर्थ

वे बार-बार गरजते हैं और निरन्तर उछल-कूद करते हैं। वे मल्ल के समान वेश धारण कर नाचते हैं। उनके अरुण नेत्रों से प्रेम की वर्षा होकर सारी पृथ्वी को सींच देती है।

धरणी-मण्डले प्रेमेर बादर करल अबधूत-चान्द ना जाने नर-नारी भुबन दश-चारि रूप हेरि हेरि कान्द
अर्थ

अवधूतों के चन्द्रमा निताई प्रभु पृथ्वी पर प्रेम के आँसुओं की वर्षा करते हैं। चौदह लोकों के स्त्री-पुरुष उन्हें समझ नहीं पाते। उनके अद्भुत सुन्दर रूप को देख-देखकर वे रो पड़ते हैं।

शान्तिपुर-नाथ गरजे अबिरत देखिया प्रेमेर बिकार धरिया श्री-चरण करये रोदन पण्डित श्रीबास उदार
अर्थ

निताई का प्रेम-भाव देखकर शान्तिपुर के स्वामी अद्वैत आचार्य बार-बार गरज उठते हैं। उदार श्रीवास पण्डित निताई के चरण पकड़कर रोने लगते हैं।

मुकुन्द कुतूहली कान्दये फुलि फुलि धरिया गदाधर कोर नयने बहे प्रेम ठाकुर अभिराम सघने हरि हरि बोल
अर्थ

मुकुन्द आनन्द से रो पड़ते हैं। विभोर होकर वे गदाधर को गले लगा लेते हैं। अभिराम ठाकुर की आँखों से प्रेम के आँसू बहते हैं। वे 'हरि! हरि!' पुकारते हैं।

नाजाने दिबा-निशि प्रेम-रसे भासि सकल सहचर बृन्दे शङ्कर घोष दास करत प्रति-आश निता-इ-चरणारबिन्दे
अर्थ

सब लोग प्रेम-रस में तैर रहे हैं। किसी को पता नहीं रहता कि दिन है या रात। शंकर घोष दास निताई प्रभु के चरण-कमलों को पाने की आस रखते हैं।

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