Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

तातल सैकते

तातल सैकते, बारि-बिन्दु-सम, सुत-मित-रमणी-समाजे तोहे विसरि मन, ताहे समर्पल, अब् मझु हबो कोन् काजे
अर्थ

हे प्रभु, आपको पूरी तरह भुलाकर मैंने अपना मन स्त्रियों, बच्चों और मित्रों के समाज को अर्पित कर दिया, पर यह अनुभव वैसा ही रहा जैसे तट की जलती हुई गरम रेत पर जल की एक बूँद डालना। इस घोर दुःख से मैं कैसे छूट सकूँगा?

माधव! हाम परिणाम् निराशा तुहुँ जग-तारण, दीन दोया-मोय्, अतये तोहारि विशोयासा
अर्थ

हे माधव! इसके परिणामस्वरूप मैं पूरी तरह निराश हो गया हूँ। आप जगत् के उद्धारक हैं और असहाय जीवों पर दया करने वाले हैं। इसलिए मैं अपनी आशा केवल आप में रखता हूँ।

आध जनम हाम, निन्दे गोयायलुँ, जरा शिशु कोतो-दिन गेला निधुवने रमणी, रस-रङ्गे मातल, तोहे भजबो कोन् बेला
अर्थ

अधमरी अवस्था में भटकते हुए मैंने अपना जीवन घोर अपयश में बिताया। लापरवाह बालक और निकम्मे बूढ़े के रूप में अनगिनत दिन बीत गए। सुन्दर युवतियों के साथ प्रेम-प्रसंगों के सुख में मैं मतवाला रहा हूँ। मुझे आपका भजन करने का अवसर कब मिलेगा?

कोतो चतुरानन, मरि मरि जाओत, न तुया आदि अवसाना तोहे जनमि पुन, तोहे समाओत, सागर-लहरी समाना
अर्थ

अनगिनत चतुर्मुख ब्रह्मा एक के बाद एक मर चुके हैं, जबकि आपका न आदि है, न अन्त। वे सब आपसे ही जन्म लेते हैं और फिर आप में ही लीन हो जाते हैं, ठीक सागर की लहरों की तरह।

भणये विद्यापति, शेष शमन-भोय्, तुया विना गति नाहि आरा आदि-अनादिक, नाथ कहायसि, भव-तारण भार तोहारा
अर्थ

विद्यापति स्वीकार करते हैं कि अब, जीवन के अन्त में, उन्हें मृत्यु (यमराज) का भय सता रहा है। हे प्रभु! आपके सिवा कोई शरण नहीं है। आप आदि और अनादि दोनों के स्वामी के रूप में सदा प्रसिद्ध रहेंगे। अब भौतिक संसार से मेरे उद्धार का दायित्व पूरी तरह आपका है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
विद्यापति
पद
5

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।