Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बन्धु सङ्गे यदि तव रङ्ग

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बन्धु-सङ्गे यदि तव रङ्ग परिहास, थाके अभिलाष (थाके अभिलाष) तबे मोर कथा राख, जेयो नाको जेयो नाको, मथुराय केशी-तीर्थ-घाटेर सकाश
अर्थ

यदि तुम अपने बन्धु-बान्धवों के साथ हास-परिहास का सुख भोगना चाहते हो, यदि सचमुच यही तुम्हारी इच्छा है, तो मेरी बात सुनो। मथुरा में केशी-घाट के पास मत जाओ, मत जाओ।

गोविन्द विग्रह धरि’, तथाय आछेन हरि, नयने वङ्किम-दृष्टि, मुखे मन्द-हास किवा त्रि-भङ्गम ठाम, वर्ण समुज्ज्वल श्याम, नव-किशलय शोभा श्री अङ्गे प्रकाश
अर्थ

वहाँ श्रीहरि गोविन्द का रूप धारण करके विराजमान हैं, जो सबको आनन्द देते हैं। उनकी तिरछी चितवन बड़ी मोहक है और मुख पर मन्द मुस्कान है। वे त्रिभंग मुद्रा में खड़े हैं, उनका श्याम वर्ण बहुत उज्ज्वल है, और उनके अंग नये कोमल पत्तों जैसे सुन्दर हैं।

अधरे वंशी-टी ता’र, अनर्थेर मूलाधार, शिखि-चूडाकेओ भाइ कोरो ना विश्वास से मूर्ति नयने हेरे, केह नाहि घरे फिरे, संसारी गृहीर जे गो होय सर्व-नाश (ताइ मोर मने बड त्रास) घटिबे विपद भारी, जेयो नाको हे संसारि, मथुराय केशी-तीर्थ-घाटेर सकाश
अर्थ

उनके अधरों पर सजी वंशी की ध्वनि ही सारे अनर्थ की जड़ है। हे भाई, मोर-पंख का मुकुट धारण करने वाले उस पुरुष पर विश्वास मत करना। यदि तुम उस रूप को देख लोगे, तो फिर घर नहीं लौट सकोगे, और तुम्हारा गृहस्थ जीवन नष्ट हो जायेगा। (मुझे इसी का बड़ा भय है!) वहाँ जाने से भारी संकट आ सकता है। यदि तुम गृहस्थ-जीवन का सुख चाहते हो, तो मथुरा में केशी-घाट के पास मत जाओ।

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।