'राधा कृष्ण' बोल् बोल्
"राधा-कृष्ण" बोलो, बोलो, सब बोलो! यह शिक्षा देते हुए गौर-निताई सारे नदिया में नाचते हुए घूम रहे हैं। हे भाइयो, तुम व्यर्थ ही माया के वश में बहे जा रहे हो, कभी डूबते और कभी उभरते हुए।
यदि तुम यह विश्वास कर लो कि जीव कृष्ण का नित्य दास है, तो फिर कोई दुःख शेष नहीं रहेगा। जब तुम कृष्ण का नाम बोलोगे, तो शरीर में रोमांच होगा और आँखों से अश्रु बहेंगे, यही मैं कहता हूँ।
"राधा-कृष्ण" बोलो और साथ चलो, मेरी यही एक विनती है। भक्तिविनोद कहते हैं, "जब मैं यह नाम गाता हूँ, तो सारी विपदाएँ दूर हो जाती हैं।"
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- वैष्णव आचार्यों के भजन
- पद
- 3
- रिकॉर्डिंग
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।