Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
भाबे गर गर निता-इ सुन्दर हेरि गोराचान्देर छटा कत उठे चिते नारे थिर हैते प्रति अङ्गे नब पूलक घटा
अर्थ

गौरचन्द्र की चन्द्रकिरण-सी शोभा को देखकर सुन्दर निताई भाव-विभोर हो उठते हैं। हृदय में कितना आनन्द उमड़ता है, वे स्थिर नहीं रह पाते। उनके रोम-रोम में नया पुलक छा जाता है।

किबा उनमाद क्षणे सिंह-नाद क्षणे लोटे धरा-तले क्षणे दीर्घ-श्वास क्षणे महा-हास खसे बास भासे आङ्खेर जले
अर्थ

वे प्रेम के उन्माद में मत्त हो गए हैं। कभी सिंह के समान गरजते हैं, कभी धरती पर लोटने लगते हैं। कभी लंबी साँस भरते हैं, कभी खुलकर हँसते हैं। कभी उनके वस्त्र अस्त-व्यस्त हो जाते हैं, कभी वे अपने ही नेत्रों से बहते आँसुओं में तैरने लगते हैं।

क्षणे जोड लम्फ क्षणे देहे कम्प खेने याय केह केह धरिते नारे क्षणे किबा कैया बहे थीर हैया सामा-इया बिश्वम्भेर कोरे
अर्थ

कभी वे उछल पड़ते हैं, कभी उनका शरीर कांपने लगता है। कभी वे इतने उन्मत्त हो जाते हैं कि कोई उन्हें थाम नहीं पाता। कभी वे शांत और स्थिर होकर विश्वम्भर को अपनी छाती से लगा लेते हैं।

नित्यानन्द कोले लैया नेत्र-जले भासे किबा प्रभु प्रेमेर रीति कहे नरहरि श्रीबासादि चारि पाशे कान्दे केह ना धरे धृति
अर्थ

विश्वम्भर को गले लगाकर निताई अपने नेत्रों से बहते आँसुओं में दोनों को तैरा देते हैं। यही निताई के प्रेम की रीति है। नरहरि कहते हैं, श्रीवास आदि चारों भाई पास खड़े रोते हैं, उनमें से कोई भी धीरज नहीं रख पाता।