Nandgram Dham
Nandgram Dham Vaishnava Songs · nandgramdham.org/songs

भावो ना भावो ना,

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

भावो ना भावो ना, मन, तुमि अति दुष्ट (विषय-विषे आछो हे) काम-क्रोध-लोभ-मोह-मदादि-आविष्ट (रिपुर् बशे आछो हे)
अर्थ

तू नहीं समझता, हे मन, तू नहीं समझता कि तू कितना दुष्ट है। तू विषय-भोग के विष में डूबा हुआ है। तू काम, क्रोध, लोभ, मोह और मद से आविष्ट है, तू इन शत्रुओं के वश में है।

असद्-वार्ता-भुक्ति-मुक्ति-पिपासा-आकृष्ट (असत्-कथा भालो लागे हे) प्रतिष्ठाशा-कुटिनाटि-शठतादि-पिष्ट (सरल तो' हो'ले ना हे) घिरेछे तोमारे, भाइ, ए सब् अरिष्ट (ए सब् तो' शत्रु हे)
अर्थ

तू व्यर्थ की बातों तथा भोग और मुक्ति की प्यास से खिंचा हुआ है, तुझे निरर्थक बातें ही प्रिय लगती हैं। तू पाखंड, छल और प्रतिष्ठा की इच्छा से पिसा हुआ है, तू कभी सरल और निष्कपट नहीं बना। हे भाई, ये सब विपत्तियाँ तुझे घेरे हुए हैं, ये सब ही तेरे वास्तविक शत्रु हैं।

ए सब् ना छेडे' किसे पा'बे राधा-कृष्ण (जतने छाडो, छाडो हे) साधु-सङ्ग विना आर् कोथा तव इष्ट (साधु-सङ्ग कोरो, कोरो हे) वैष्णव-चरणे मज, घुचिबे अनिष्ट (एक्-बार् भेवे' देखो हे)
अर्थ

इन सबको त्यागे बिना तू राधा-कृष्ण को कैसे पाएगा? बड़ी सावधानी से इन्हें त्याग दे, त्याग दे। साधु-संग के बिना तेरा वास्तविक कल्याण और कहाँ है? साधु-संग कर, कर। वैष्णवों के चरणों में लीन हो जा, तेरा सारा अनिष्ट दूर हो जाएगा। एक बार सोचकर तो देख।