भावो ना भावो ना,
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
तू नहीं समझता, हे मन, तू नहीं समझता कि तू कितना दुष्ट है। तू विषय-भोग के विष में डूबा हुआ है। तू काम, क्रोध, लोभ, मोह और मद से आविष्ट है, तू इन शत्रुओं के वश में है।
तू व्यर्थ की बातों तथा भोग और मुक्ति की प्यास से खिंचा हुआ है, तुझे निरर्थक बातें ही प्रिय लगती हैं। तू पाखंड, छल और प्रतिष्ठा की इच्छा से पिसा हुआ है, तू कभी सरल और निष्कपट नहीं बना। हे भाई, ये सब विपत्तियाँ तुझे घेरे हुए हैं, ये सब ही तेरे वास्तविक शत्रु हैं।
इन सबको त्यागे बिना तू राधा-कृष्ण को कैसे पाएगा? बड़ी सावधानी से इन्हें त्याग दे, त्याग दे। साधु-संग के बिना तेरा वास्तविक कल्याण और कहाँ है? साधु-संग कर, कर। वैष्णवों के चरणों में लीन हो जा, तेरा सारा अनिष्ट दूर हो जाएगा। एक बार सोचकर तो देख।