Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

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बोरो सुखेर् खबोर् गाइ सुरभि-कुञ्जेते नामेर् हाट् खुले'छे / खोद निताइ
अर्थ

मैं परम सुख का समाचार गा रहा हूँ! श्री नवद्वीप के सुरभि-कुंज नामक स्थान में नाम की हाट खुल गयी है, और स्वयं भगवान् नित्यानन्द उसके स्वामी हैं।

बोरो मोजार् कथा ताय् श्रद्धा-मूल्ये शुद्ध-नाम सेइ हाटेते बिकाय्
अर्थ

उस आनन्दमय हाट में कैसी अद्भुत बातें हो रही हैं! श्रीनित्यानन्द प्रभु केवल श्रद्धा के मूल्य पर शुद्ध नाम बेच रहे हैं।

जत भक्त-बृन्द बसि' अधिकारी देखे' नाम बेच्छे दरो कसि'
अर्थ

नाम खरीदने को उत्सुकता से प्रतीक्षा करते भक्तों के समूह को देखकर, भगवान् नित्यानन्द पहले प्रत्येक की योग्यता परखते हैं, और फिर उसी के अनुसार मूल्य तय करके उन्हें नाम बेचते हैं।

जदि नाम किन्बे, भाइ आमार् सङ्गे चलो, महाजनेर् काछे जाइ
अर्थ

हे मेरे प्रिय मित्रो! यदि तुम सचमुच यह शुद्ध नाम खरीदना चाहते हो, तो मेरे साथ चलो, क्योंकि मैं अभी इन नित्यानन्द महाजन से मिलने जा रहा हूँ।

तुमि किन्बे कृष्ण-नाम दस्तुरि लोइबो आमि, पूर्ण ह'बे काम
अर्थ

इस प्रकार तुम अन्ततः यह शुद्ध नाम पा सकोगे। मैं भी अपनी उचित दस्तूरी लूँगा, और इस प्रकार हम तीनों की कामना पूरी होगी।

बोरो दोयाल् नित्यानन्द श्रद्धा-मात्र लो'ये देन् परम-आनन्द
अर्थ

श्रीनित्यानन्द प्रभु अत्यन्त दयालु हैं। वे केवल किसी की श्रद्धा को ग्रहण करके उसे परम आनन्द प्रदान करते हैं।

एक्-बार् देख्ले चक्षे जल् 'गौर' बोले' निताइ देन् सकल सम्बल्
अर्थ

जब निताई किसी की आँख में 'गौर!' नाम लेते समय आँसू देखते हैं, तो वे तुरन्त उस व्यक्ति को अपना सहारा देते हैं, और उसे सभी दिव्य ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।

देन् शुद्ध कृष्ण-शिक्षा जाति, धन, विद्या, बल ना कोरे अपेक्षा
अर्थ

वे उस व्यक्ति को श्रीकृष्ण की शुद्ध शिक्षा का यथार्थ बोध प्रदान करते हैं, जैसा भगवद्गीता और श्रीमद्भागवत में वर्णित है। यह अचिन्त्य कृपा दिखाते हुए भी वे किसी की जाति, धन, विद्या या शारीरिक बल की कोई परवाह नहीं करते।

अमनि छाडे माया-जाल् गृहे थाको, बने थाको, ना थाके जञ्जाल्
अर्थ

अब, प्रिय मित्रो, माया के इस फँसाने वाले जाल को त्याग दो। यदि तुम गृहस्थ हो, तो घर में ही रहो, यदि संन्यासी हो, तो वन में ही रहो। दोनों ही स्थितियों में अब तुम्हें कोई और कष्ट नहीं होगा।

आर् नाइको कलिर् भोय् आचण्डाले देन् नाम निताइ दोयामोय्
अर्थ

अब हमें भयानक कलियुग से डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि परम दयालु भगवान् नित्यानन्द सभी को, यहाँ तक कि सबसे नीच व्यक्ति को भी, नाम प्रदान करते हैं।

भक्तिविनोद डाकि' कोय् निताइ-चरण बिना आर् नाहि आश्रोय्
अर्थ

भक्तिविनोद ऊँची पुकार से सबको यह घोषणा करते हैं: भगवान् नित्यानन्द के चरण-कमलों के अतिरिक्त और कोई शरण नहीं है!

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, हरे कृष्ण मन्दिर। सभी भक्त गायकों की जय।