गौराङ्ग दयार निधि गुण अगणन
भगवान गौरांग दया के भण्डार हैं। उनके गुण गिनती से परे हैं। उनके समान कुछ भी नहीं है।
कल्पवृक्ष इच्छाएँ तभी पूरी करता है, जब कोई उसके पास जाकर माँगता है।
सागर केवल एक बूँद छलकाकर पीछे हट सकता है। चन्द्रमा महीने में केवल कुछ ही समय उजली चाँदनी बरसाता है।
भगवान गौरांग यह विचार नहीं करते कि जो रत्न वे बाँट रहे हैं, उन्हें पाने के योग्य कौन है और अयोग्य कौन। वे यह भी विचार नहीं करते कि कौन-सा समय उचित है और कौन-सा नहीं।
सबसे विनती कर-करके कि वे इसे स्वीकार करें, वे सदा एक अमूल्य खजाना बाँटते रहते हैं। उन्होंने यह सबको दे दिया है। केवल संकर्षण दास को यह नहीं मिला। केवल वही ठगा गया।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- संकर्षण दास
- पद
- 5