गोरा प्रेमे मातिया निता इ
गौर प्रभु के प्रेम में मतवाले निताई प्रभु अपनी करुणा भरी चितवन से अब सारे संसार को भी उसी प्रेम में मतवाला कर देते हैं।
अपनी भुजाएँ उठाकर, ऐसी भुजाएँ जो उनके घुटनों तक पहुँचती हैं, निताई प्रभु नाचते हैं। वे गिरे हुए जीवों को गले लगाते हैं। वे झूमते हैं। प्रेम से अभिभूत होकर वे धरती पर गिर जाते हैं।
उनके हृदय में कितना आनंद उमड़ता है? वह आनंद आँसू बनकर उनके मुख और छाती पर बहता है। वे उन्हीं आँसुओं में तैरते हैं।
उनके प्रत्येक अंग के रोम खड़े हो जाते हैं। उनके दिव्य रूप की महिमा देखकर कामदेव मूर्छित हो जाता है।
उनके चंद्रमा जैसे मुख पर एक कोमल मुस्कान है। उनके मधुर वचन अमृत की बाढ़ के समान हैं।
उनके नित-नए सुंदर, लाल चरण कितने मनोहर हैं! निताई प्रभु के उन्हीं चरणों में नरहरि दास अपनी हर साँस समर्पित करते हैं।