Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गुरुदेवे व्रज वने व्रज भूमि

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गुरुदेवे, व्रज-वने, व्रज-भूमि-वासी जने, शुद्ध-भक्ते, आर विप्र-गणे इष्ट-मन्त्रे, हरि-नामे, युगल भजन कामे, कर रति अपूर्व यतने
अर्थ

गुरुदेव, श्री वृंदावन, वृंदावनवासी जन, शुद्ध वैष्णव, ब्राह्मण-गण, इष्ट-मंत्र, हरि-नाम, तथा युगल की सेवा की चाह: इन आठों की मैं अत्यंत श्रद्धा से आराधना करता हूँ।

धरि मन चरणे तोमार जानियाछि एबे सार, कृष्ण-भक्ति विना आर, नाहि घुचे जीवेर संसार
अर्थ

हे मन, तुम्हारे चरण पकड़कर मैं यह विनती करता हूँ। अब हमने यह सार समझ लिया है कि कृष्ण की भक्ति के बिना जीव का यह संसार-भ्रम कभी नहीं मिटता।

कर्म, ज्ञान, तपः, योग, सकलइ त कर्म-भोग, कर्म छाड़ाइते केह नारे सकल छाड़िया भाइ, श्रद्धा-देवीर गुण गाइ, याँर कृपा भक्ति दिते पारे
अर्थ

कर्म, ज्ञान, तप और योग, ये सब वस्तुतः कर्म-भोग ही हैं। इनसे कोई भी कर्म-बंधन से मुक्त नहीं हो सकता। हे भाई, इन सबको त्यागकर श्रद्धा-देवी की महिमा गाओ, जिनकी कृपा से ही शुद्ध भक्ति प्राप्त होती है।

छाड़ि' दम्भ अनुक्षण, स्मर अष्ट-तत्त्व मन, कर ताहे निष्कपट रति सेइ रति प्रार्थनाय, श्री-दास-गोस्वामी पाय, ए भकतिविनोद करे नति
अर्थ

हे मन, अपना दम्भ सदा के लिए छोड़ दो। उन आठ तत्त्वों का स्मरण करो और निष्कपट हृदय से उनमें अनुराग रखो। उसी अनुराग की कामना करते हुए यह भक्तिविनोद श्री दास गोस्वामी के चरणों में प्रार्थना करता है।

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।