'हरि' बोले' मोदेर गौर एलो
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
'हरि' पुकारते हुए हमारे गौर आ गए हैं!
वे आ गए हैं, चन्द्र-सम गौरांग, प्रेम से छलकते और लड़खड़ाते हुए; निताई और अद्वैत के साथ वे गोद्रुम में प्रवेश कर गए हैं।
संकीर्तन के रस में मतवाले होकर उन्होंने नाम बाँटा; नाम के बाजार में पहुँचकर उन्होंने सारे संसार को प्रेम से भर दिया।
आज गोद्रुमवासियों का दुःख दूर चला गया है; अपने भक्त-समूह के साथ आकर उन्होंने नाम के बाजार को जगा दिया है।
नदिया में विचरण करते हुए गौर नाम के बाजार में आ पहुँचे हैं; गौर उस बाजार में आ गए हैं, और निताई भी उनके साथ वहाँ आ गए हैं।
मतवाले निताई गोद्रुम के मैदान में नाचते हैं; निताई प्रेम की कुश्ती से सारे संसार को उन्मत्त कर देते हैं।
जाकर स्वयं देख ले! अद्वैत और भक्तों का समूह घाट-घाट पर नाचते हैं; प्रचण्ड कलि भागकर घोर व्याकुलता में गिर पड़ता है।
कितने आनन्द से जीव गौरचन्द्र के नृत्य में बहते चले जा रहे हैं! यह देखकर और सुनकर पाषण्डियों के हृदय ईर्ष्या से फट पड़ते हैं।