जय जय गोराचाँदेर आरतिक
सुनें
7 रिकॉर्डिंगजय जय चैतन्य महाप्रभु की आरती की शोभा! यह गौर-आरती गंगा के तट पर एक वन में हो रही है और सारे जगत के मन को मोहित कर रही है।
चैतन्य महाप्रभु के दाहिने नित्यानन्द चन्द्र हैं, और बाएँ श्री गदाधर हैं। समीप श्री अद्वैत आचार्य खड़े हैं, और श्रीवास ठाकुर उनके ऊपर छत्र धारण किए हुए हैं।
चैतन्य महाप्रभु रत्न-सिंहासन पर बैठे हैं, और ब्रह्मा आदि देवगण उनकी आरती कर रहे हैं।
नरहरि आदि पार्षद उन पर चामर डुला रहे हैं, और संजय, मुकुन्द, वासु घोष आदि भक्त मधुर कीर्तन गा रहे हैं।
शंख बज रहे हैं, घंटा बज रहा है, करताल बज रहे हैं, और मृदंग अत्यन्त मधुर स्वर में बज रहा है। यह कीर्तन-संगीत सुनने में परम मधुर और रसमय है।
चैतन्य महाप्रभु के मुख की चमक करोड़ों चन्द्रमाओं को भी जीत लेती है, और उनके गले में वनमाला की शोभा जगमगा रही है।
शिव, शुकदेव और नारद प्रेम में गद्गद हैं, और भक्तिविनोद ठाकुर चैतन्य महाप्रभु की इस महिमा को देख रहे हैं।
यह भजन यहाँ भी है
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।