जीव् जागो, जीव् जागो
जीव जागो, जीव जागो, गौरांग पुकार रहे हैं: 'तुम कब तक माया-पिशाचिनी की गोद में सोए रहोगे?'
'भजूँगा' यह कहकर तुम इस संसार में आए, परन्तु उसे भूलकर अविद्या के भार तले पड़े रहे।
'तुम्हारा उद्धार करने के लिए ही मैंने अवतार लिया है। मेरे सिवा तुम्हारा दूसरा कौन मित्र है?'
'मैं माया रूपी रोग को नष्ट करने की औषधि लाया हूँ। अब तुम यह हरे कृष्ण महामंत्र माँगकर ले लो।'
भक्तिविनोद ने प्रभु गौरांग के चरणों में गिरकर, विनती करके वह हरे कृष्ण महामंत्र प्राप्त किया।
इस भजन के बारे में
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- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।