Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

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कबे ह'बे बोलो से-दिन आमार् (आमार्) अपराध घुचि', शुद्ध नामे रुचि, कृपा-बले ह'बे हृदोये सञ्चार्
अर्थ

मुझे बताओ, वह दिन कब आएगा जब मेरे अपराध समाप्त होंगे, और कृपा के बल से मेरे हृदय में शुद्ध नाम के प्रति रुचि का संचार होगा?

तृणाधिक हीन, कबे निजे मानि', सहिष्णुता-गुण हृदोयेते आनि' सकले मानद, आपनि अमानी, हो'ये आस्वादिबो नाम-रस-सार्
अर्थ

स्वयं को तृण से भी नीचा मानकर, हृदय में सहनशीलता का गुण लाकर, सबका आदर करते हुए और अभिमान से मुक्त होकर, कब मैं नाम-रस के सार का आस्वादन करूँगा?

धन जन आर, कोबिता-सुन्दरी, बोलिबो ना चाहि देहो-सुख-करी जन्मे-जन्मे दाओ, ओहे गौरहरि! अहैतुकी भक्ति चरणे तोमार्
अर्थ

धन, अनुयायी, और लौकिक काव्य में वर्णित सुन्दरियाँ, इनमें से किसी भी शारीरिक सुख की मुझे चाह नहीं है। हे गौरहरि! मुझे जन्म-जन्म में अपने चरणों के प्रति निष्काम भक्ति प्रदान करो।

(कबे) कोरिते श्री-कृष्ण-नाम उच्चारण, पुलकित देहो गद्गद बचन बैबर्ण्य-बेपथु ह'बे सङ्घटन, निरन्तर नेत्रे ब'बे अश्रु-धार्
अर्थ

कब श्रीकृष्ण का नाम लेते हुए मेरा शरीर रोमांचित होगा और मेरी वाणी गद्गद हो जाएगी? कब मेरे शरीर का रंग बदलेगा और कम्पन होगा, और कब मेरी आँखों से निरन्तर आँसुओं की धारा बहेगी?

कबे नवद्वीपे, सुरधुनी-तटे, गौर-नित्यानन्द बोलि' निष्कपटे नाचिया गाइया, बेराइबो छुटे, बातुलेर प्राय छारिया बिचार्
अर्थ

कब मैं नवद्वीप में स्वर्ग-गंगा के तट पर, निष्कपट भाव से 'गौर-नित्यानन्द!' पुकारते हुए, नाचते-गाते, पागल की तरह विवेक छोड़कर दौड़ता रहूँगा?

कबे नित्यानन्द, मोरे कोरि 'दोया, छाराइबे मोर विषयेर माया दिया मोरे निज-चरणेर छाया, नामेर हाटेते दिबे अधिकार्
अर्थ

कब नित्यानन्द मुझ पर कृपा करके मुझे इस सांसारिक माया से मुक्त करेंगे? कब वे मुझे अपने चरणों की छाया देकर नाम के हाट में प्रवेश का अधिकार देंगे?

किनिबो, लुटिबो, हरि-नाम-रस, नाम-रसे माति' होइबो बिबश रसेर रसिक-चरण परश, कोरिया मोजिबो रसे अनिबार्
अर्थ

मैं हरि-नाम के रस को खरीदूँगा, लूट लूँगा, और उस नाम-रस में मतवाला होकर बेसुध हो जाऊँगा। उस रस के रसिक महात्माओं के चरण छूकर मैं निरन्तर उस रस में डूबा रहूँगा।

कबे जीबे दोया, होइबे उदोय, निज-सुख भुलि' सुदीन-हृदोय भकतिविनोद, कोरिया बिनोय, श्री-आज्ञा-टहल कोरिबे प्रचार्
अर्थ

कब इस भक्तिविनोद के हृदय में समस्त पतित जीवों के लिए दया का उदय होगा, और कब वे अपने सुख को भूलकर, विनीत हृदय से, विनयपूर्वक श्री चैतन्य महाप्रभु की पवित्र आज्ञा का प्रचार करने निकलेंगे?

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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, हरे कृष्ण मन्दिर, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।