कबे ह'बे बोलो
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9 रिकॉर्डिंगमुझे बताओ, वह दिन कब आएगा जब मेरे अपराध समाप्त होंगे, और कृपा के बल से मेरे हृदय में शुद्ध नाम के प्रति रुचि का संचार होगा?
स्वयं को तृण से भी नीचा मानकर, हृदय में सहनशीलता का गुण लाकर, सबका आदर करते हुए और अभिमान से मुक्त होकर, कब मैं नाम-रस के सार का आस्वादन करूँगा?
धन, अनुयायी, और लौकिक काव्य में वर्णित सुन्दरियाँ, इनमें से किसी भी शारीरिक सुख की मुझे चाह नहीं है। हे गौरहरि! मुझे जन्म-जन्म में अपने चरणों के प्रति निष्काम भक्ति प्रदान करो।
कब श्रीकृष्ण का नाम लेते हुए मेरा शरीर रोमांचित होगा और मेरी वाणी गद्गद हो जाएगी? कब मेरे शरीर का रंग बदलेगा और कम्पन होगा, और कब मेरी आँखों से निरन्तर आँसुओं की धारा बहेगी?
कब मैं नवद्वीप में स्वर्ग-गंगा के तट पर, निष्कपट भाव से 'गौर-नित्यानन्द!' पुकारते हुए, नाचते-गाते, पागल की तरह विवेक छोड़कर दौड़ता रहूँगा?
कब नित्यानन्द मुझ पर कृपा करके मुझे इस सांसारिक माया से मुक्त करेंगे? कब वे मुझे अपने चरणों की छाया देकर नाम के हाट में प्रवेश का अधिकार देंगे?
मैं हरि-नाम के रस को खरीदूँगा, लूट लूँगा, और उस नाम-रस में मतवाला होकर बेसुध हो जाऊँगा। उस रस के रसिक महात्माओं के चरण छूकर मैं निरन्तर उस रस में डूबा रहूँगा।
कब इस भक्तिविनोद के हृदय में समस्त पतित जीवों के लिए दया का उदय होगा, और कब वे अपने सुख को भूलकर, विनीत हृदय से, विनयपूर्वक श्री चैतन्य महाप्रभु की पवित्र आज्ञा का प्रचार करने निकलेंगे?
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, हरे कृष्ण मन्दिर, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।