Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

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पखि ना जानि कोन् अपराधे मुखे हरे कृष्ण नाम् बोलो ना
अर्थ

मेरे मन की यह चिड़िया नहीं जानती कि किस अपराध के कारण उसके मुख से हरे कृष्ण नाम नहीं निकलता।

बनेर् पखि रे धरे राक्लाम् हृदोय् मन्दिरे मधु माखा एइ हरि नाम् पखि रे शिखैले शिखे
अर्थ

हे वन के पक्षी! मैंने अपने हृदय के मन्दिर में तुम्हारे लिए एक वस्तु बड़े जतन से रखी है: यह हरि-नाम, जो मधु से भरा है। हे पक्षी! सिखाने पर तुम इसे सीख सकते हो।

पखि सकल् नाम् बोल्ते परो केनो हरे कृष्ण नाम् बोलो न केनो हरे कृष्ण नाम् हरि बोले मनो प्राण् काँदे ना
अर्थ

पक्षी तो सभी नाम बोल सकता है, फिर मेरे मन की यह चिड़िया हरे कृष्ण नाम क्यों नहीं बोलती? हरे कृष्ण नाम बोलते हुए मेरा मन-प्राण क्यों नहीं रो उठता?

छलो पखि रूपेर् देशे जाइ जे देशेते मनेर् मानुश् आसा जाओया नाइ
अर्थ

आओ पक्षी, चलो हम उस सौन्दर्य के लोक में चलें, जहाँ मेरे मन का काल्पनिक पुरुष फिर कभी जन्म-मृत्यु के चक्र में आना-जाना नहीं करेगा।

पखि रे तोर् मरण कालेते चरबि वासेर् दोलाते ओरे चार् जनेते कन्धे कोरे लोये जाबे स्मशन् घाटेते
अर्थ

हे पक्षी! मृत्यु के समय तुम्हारे शरीर को बाँस की अर्थी पर रखा जाएगा, और चार लोग उसे अपने कन्धों पर उठाकर श्मशान घाट तक ले जाएँगे।

ओरे ओ तोर् मुखे आगुन जिह्वे तुले कि कोरोबि ताइ बोलो ना
अर्थ

हाय! तब वह अग्नि तुम्हारे मुख में प्रवेश करेगी और तुम्हारी जिह्वा को पूरी तरह भस्म कर देगी। तब तुम कुछ भी नहीं कर पाओगे, क्योंकि तब तुम बोल भी नहीं सकोगे।

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।