Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

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भाइ-रे! शरीर अबिद्या-जाल्, जोडेन्द्रिय ताहे काल्, जीवे फेले विषय-सागोरे ता'र मध्ये जिह्वा अति, लोभमोय् सुदुर्मति, ता'के जेता कठिन संसारे कृष्ण बरो दोयामोय्, कोरिबारे जिह्वा जय्, स्व-प्रसाद्-अन्न दिलो भाइ सेइ अन्नामृत पाओ, राधा-कृष्ण-गुण गाओ, प्रेमे डाको चैतन्य-निताइ
अर्थ

हे भाई! यह शरीर अविद्या का जाल है और जड़ इन्द्रियाँ मृत्यु के समान हैं, जो जीव को विषय-भोग के सागर में डाल देती हैं। इन इन्द्रियों में जिह्वा सबसे अधिक लोभी और दुर्दम्य है, इस संसार में उसे वश में करना अत्यंत कठिन है। परन्तु कृष्ण अत्यंत दयामय हैं, उन्होंने जिह्वा को जीतने के लिए ही अपना प्रसाद हमें दिया है। उस अमृतमय अन्न को ग्रहण करो, राधा-कृष्ण के गुणों का गान करो और प्रेमपूर्वक चैतन्य-निताई को पुकारो।

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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।