Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

आमार जीवन

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आमार जीवन, सदा पापे रत, नाहिको पुण्येर लेष परेरे उद्वेग, दियाछि ये कोतो, दियाछि जीवेरे क्लेश
अर्थ

मेरा जीवन सदा पाप में लिप्त रहता है, पुण्य का तो कोई अंश भी नहीं है। मैं सदा दूसरे जीवों को चिन्ता और कष्ट देता रहा हूँ।

निज सुख लागि', पापे नाहि डोरि, दया-हीन स्वार्थ-परो पर-सुखे दुःखी, सदा मिथ्य-भाषी, पर-दुःख सुख-करो
अर्थ

अपने ही सुख के लिये मैं किसी भी पाप-कर्म से पीछे नहीं हटता। मुझमें दया नहीं है, मैं केवल अपने स्वार्थ में लगा रहता हूँ। दूसरों के दुःख में मुझे सुख मिलता है, मैं सदा झूठ बोलता हूँ, और किसी को कष्ट में देखकर मन में आनन्द होता है।

आशेष कामना, हृदि माझे मोर, क्रोधी, दम्भ-परायण मद-मत्त सदा, विषये मोहित, हिंसा-गर्व विभूषण
अर्थ

मेरे हृदय में अनन्त कामनाएँ भरी हैं, मैं सदा क्रोधी और कपटी हूँ। इन्द्रिय-सुख के विषयों में मोहित होकर मैं उन्माद की स्थिति में रहता हूँ। द्वेष और मिथ्या-अभिमान ही मेरे आभूषण हैं।

निद्रालस्य हत, सुकार्ये विरत, अकार्ये उद्योगी आमि प्रतिष्ठ लागिया, शाठ्य-आचरण, लोभ-हत सदा कामी
अर्थ

निद्रा और आलस्य ने मुझे जीत लिया है, मैं सत्कर्म से सदा दूर भागता हूँ, परन्तु दुष्कर्म करने में मुझे बड़ा उत्साह रहता है। अपनी प्रतिष्ठा के लिये मैं सदा छल-कपट करता हूँ, लोभ ने मुझे जीत लिया है, और मैं सदा कामी हूँ।

ए हेनो दुर्जन, सज्-जन-वर्जित, अपराधि निरन्तर शुभ-कार्य-शून्य, सदानर्थ-मनाः, नाना दुःखे जर जर
अर्थ

मैं ऐसा पतित हूँ कि साधु-सन्तों की संगति भी मुझे नहीं मिली, और मैं सदा अपराधी बना रहा। मेरे जीवन में शुभ कर्म का कोई अंश नहीं है, और मेरा मन सदा किसी न किसी उपद्रव की ओर खिंचा रहता है। इसीलिये जीवन के इस अन्तिम पड़ाव में इन्हीं दुःखों से मैं जर्जर हो चुका हूँ।

बार्धक्ये एखोन, उपाय-विहीन, ता'ते दीन अकिञ्चन भकतिविनोद, प्रभुर चरणे, कोरे दुःख निवेदन
अर्थ

अब बुढ़ापे में, और कोई उपाय न रहने से, मैं विवश होकर दीन और निरुपाय बन गया हूँ। इस प्रकार भक्तिविनोद अपने जीवन का यह दुःखमय निवेदन भगवान् के श्रीचरणों में प्रस्तुत करते हैं।

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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।