अम्बुदाञ्जनेन्द्र नील (कृष्णचन्द्राष्टकम्)
उनका अत्यन्त सुन्दर वर्ण वर्षा के बादलों, काजल और नीलमणियों की सम्मिलित शोभा को भी तुच्छ कर देता है। उनके वस्त्र कुंकुम चूर्ण से रंगे उगते सूर्य की तरह दीप्तिमान हैं और चमकती बिजली की कौंध से और भी निखर उठे हैं। उनके सुडौल अंगों पर कपूर और केसर मिले चन्दन का लेप है। ग्वालों के राजा के पुत्र श्री कृष्ण मुझे अपने ही चरण-कमलों की सेवा प्रदान करें।
उनके शार्क के आकार के कुण्डल उनके गालों पर बड़ी कुशलता से नृत्य करते हैं। उनके मुखमण्डल की सुन्दरता चन्द्रमाओं और कमल-पुष्पों के समूह के गर्व को चूर कर देती है। वे गोपियों के बीच अपने ही गुप्त प्रेम-भावों की गाँठ को और अधिक कसते जाते हैं। ग्वालों के राजा के पुत्र श्री कृष्ण मुझे अपने ही चरण-कमलों की सेवा प्रदान करें।
वे सदा अपने यौवन-रूप, वेश-भूषा और प्रेममयी लीलाओं के नित नए रूप रचने में लगे रहते हैं। ग्वाल-सखाओं की मण्डली उन्हें घेरे रहती है, जो अपने विनोद-भरे हँसी-मजाक से उन्हें आनन्द देने में सबसे आगे हैं। उनके निजी क्रीड़ा-वन की तेजस्वी आभा की एक ही किरण इन्द्र के स्वर्गीय नन्दन-उद्यानों को हरा देती है। ग्वालों के राजा के पुत्र श्री कृष्ण मुझे अपने ही चरण-कमलों की सेवा प्रदान करें।
वे अपने भक्तों की मित्रता से आनन्दित होते हैं, जिनकी चेतना उनके प्रति शुद्ध प्रेम के सोने के आभूषणों से सजी है। ब्रह्माण्ड के अलग-अलग लोकों की रक्षा करने वाले बड़े देवता धरती पर माथा टेककर उन्हें दण्डवत् प्रणाम करते हैं और उनकी स्तुति करते हैं। वे दिन के निश्चित समयों पर ब्राह्मणों का बड़े आदर से सम्मान करते हैं। ग्वालों के राजा के पुत्र श्री कृष्ण मुझे अपने ही चरण-कमलों की सेवा प्रदान करें।
उन्होंने सहज ही इन्द्र का अभिमान और कालिय का प्रचण्ड क्रोध दूर कर दिया, और कंस तथा वत्सासुर दैत्यों का वध किया। इन विविध लीलाओं की वर्षा से वे अपने चातक पक्षी जैसे भक्तों का पोषण करते हैं। वीर स्वभाव की लीलाएँ करके वे अपने ग्वाल-समुदाय के निवासियों को आनन्दित करते हैं। ग्वालों के राजा के पुत्र श्री कृष्ण मुझे अपने ही चरण-कमलों की सेवा प्रदान करें।
वे वृन्दावन के कुंजों में रास-नृत्य की क्रीड़ा के अमृत से श्री राधिका और अन्य गोपियों को सन्तुष्ट करते हैं। उन प्रेम-लीलाओं की विविध युक्तियों के बीच वे गोपियों की मण्डली का पोषण करने के लिए तरह-तरह के विनोदपूर्ण मजाक रचते हैं। इस तरह वे अपनी प्रेममयी लीलाओं की महिमा से जगत् के सब लोगों के मन को आनन्दित करते हैं। ग्वालों के राजा के पुत्र श्री कृष्ण मुझे अपने ही चरण-कमलों की सेवा प्रदान करें।
रास-नृत्य के उत्सव की अपनी लीलाएँ प्रकट करके वे अपनी शुद्ध भक्ति का शाश्वत मार्ग भी दिखाते हैं। अपनी अद्भुत सुन्दरता और मोहक वेश से वे असंख्य कामदेवों के मन को मथ देते हैं। अपनी आँखों के बाहरी कोनों से वे गोपियों की ओर तिरछी चितवन डालते हैं, जो स्नेहभरे अनेक भावों का संकेत देती हैं। ग्वालों के राजा के पुत्र श्री कृष्ण मुझे अपने ही चरण-कमलों की सेवा प्रदान करें।
फूल चुनती हुई श्री राधिका को अचानक छूकर वे इच्छा से उत्तेजित हो जाते हैं। फिर शुद्ध प्रेम की प्रतिकूलता से सजे उनके मनोहर मुख को देखकर वे आनन्दित हो उठते हैं। सचमुच वे वही चन्दन-लेप हैं, जो राधिका के वक्ष को सजाता है। ग्वालों के राजा के पुत्र श्री कृष्ण मुझे अपने ही चरण-कमलों की सेवा प्रदान करें।
श्री राधिका को अत्यन्त प्रिय श्री कृष्ण की एक झलक पाना भी लक्ष्मी देवी और अन्य उच्च देवी-देवताओं के लिए बहुत कठिन है। परन्तु यदि कोई इन आठ श्लोकों का पूरे ध्यान से पाठ करके उनकी महिमा गाता है, तो राधिका के अंगों के घनिष्ठ संग से आनन्दित रहने वाले वे श्री कृष्ण उस व्यक्ति से प्रसन्न हो जाएँगे और उसे गोलोक वृन्दावन के ग्वाल-वनों में अपने चरण-कमलों की सेवा में लगा लेंगे।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- कृष्णदास कविराज गोस्वामी · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- वैष्णव आचार्यों के और भजन
- पद
- 9
- रिकॉर्डिंग
- 1 इस गायक के और भजन इस रचयिता के और भजन
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।