आमि तोमार् दुःखेर् दुःखी सुखेर् सुखी
मैं तुम्हारे दुःख में दुःखी और सुख में सुखी हूँ, यह मैं तुमसे सच्चे मन से कहता हूँ, हे भाइयों! नित्यानंद प्रभु के हाट से मैं तुम्हारे लिए ही हरिनाम लेकर आया हूँ।
गौरचन्द्र की छाप लगा यह हरिनाम दिव्य रस से भरा है। यदि तुम इस नाम को ग्रहण करके सदा अपने मुख में रखोगे, तो तुम्हें अनुभव होगा कि नाम में स्वयं नामी भगवान पूर्ण रूप से विद्यमान हैं।
नाम जपने से तुम्हारे सारे पाप और सांसारिक कष्ट दूर हो जाएँगे। यह संसार तुम्हारे लिए सारमय हो जाएगा, कोई भय नहीं रहेगा, और तुम सुख के सागर में डूब जाओगे।
मैं स्वयं अत्यंत दीन और निर्धन हूँ, क्योंकि भगवान का नाम यहाँ लाने में मैं भारी ऋण में डूब गया हूँ। मुझे इतना दीन देखकर तुम मुझे अपनी श्रद्धा का मूल्य दे दो।
तुमसे मूल्य लेकर, हे भाइयों, मैं वह महाजन को अर्थात् नित्यानंद प्रभु को दे दूँगा। इस व्यापार में जो थोड़ा लाभ मुझे मिलेगा, वह मैं अपने ही भंडार में रख लूँगा।
नदिया जिले के गोद्रुम द्वीप में रहकर चाँद बाउल नाम का यह व्यक्ति पुकार कर कहता है, हरिनाम के अतिरिक्त यह सारा संसार तो छाया-नाटक की माया मात्र है।