Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
आपने नचिते यबे प्रभुर मन हैल सात सम्प्रदाय लये एकत्र करिल
अर्थ

श्री गौर के मन में नाचने की इच्छा जागती है। उनके चारों ओर भक्त इकट्ठे हो जाते हैं।

उद्दण्ड नृत्ये प्रभु छाडिया हुङ्कार चक्र भ्रमि भ्रमे येन आलात आकार
अर्थ

गरजते हुए श्री गौर बेरोक-टोक नाचते हैं। गोल-गोल घूमकर नाचते हुए वे घूमती हुई जलती मशाल जैसे लगते हैं।

नृत्ये यांहा यांहा प्रभुर पडे पद-तल स-सागर शैल मही करे टलमल
अर्थ

जब भी श्री गौर के नृत्य करते चरण भूमि को स्पर्श करते हैं, पृथ्वी तथा सब सागर और पर्वत काँप उठते हैं।

स्तम्भ-स्वेद पुलकाश्रु स्वेद बैबर्ण्य नाना भाबे बिबश गर्ब हर्ष दैन्य
अर्थ

श्री गौर स्तब्ध हो जाते हैं। उनके शरीर के रोम खड़े हो जाते हैं। वे रोते हैं। उन्हें पसीना आता है। उनका रंग पीला पड़ जाता है। वे दिव्य भाव के सभी लक्षण प्रकट करते हैं। वे बारी-बारी से गर्वित, आनन्दित और विनम्र हो जाते हैं।

देखिया प्रभुर नृत्य जगन्नाथ हासे से आनन्दे भासि याय यदुनाथ दासे
अर्थ

श्री गौर के दिव्य नृत्य को देखकर श्री जगन्नाथ मुसकराते हैं। अब यदुनाथ दास आनन्द के सागर में तैरता है।