'गौराङ्ग' बोलिते हबे
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
नरोत्तम दास ठाकुर इस संग्रह के 73 भजनों के रचयिता हैं, जो इन ग्रन्थों से लिए गए हैं: प्रार्थना, प्रेम-भक्ति-चन्द्रिका, वैष्णव आचार्यों के और भजन, वैष्णव आचार्यों के भजन, और भजन। 193 रिकॉर्डिंग सुनी जा सकती हैं।
हमारे आचार्य पृष्ठ पर श्रील नरोत्तम दास ठाकुर की पूरी जीवनी पढ़ें73 भजन · पृष्ठ 1 / 2
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
निताइ-पद-कमल, कोटि-चन्द्र-सुशीतल
हरि हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः
हरि हरि! बिफले जनम गोँआइनु
जे आनिलो प्रेम-धन कोरुणा प्रचुर्
गौराङ्गेर दुटि पद, जार् धन सम्पद,
ठाकुर वैष्णव-पद अवनीर सु-सम्पद
गौरा पहु ना भजिया गोइनु
वृन्दावन रम्य-स्थान दिव्य-चिँतामणि-धाम
श्री-रूप-मञ्जरी-पद, सेइ मोर सम्पद,
अरे भाइ! भज मोर गौराङ्ग-चरण
एइ-बारो करुणा कोरो वैष्णव गोसाइ
धन मोर नित्यानन्द पति मोर गौरचन्द्र
राधा-कृष्ण प्राण मोर जुगल-किशोर
श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु दोया कोरो मोरे
गौराङ्ग करुणा कोरो, दीन हीन जने
हरि हरि! कबे मोर हैबे सुदिने
हरि हरि! बड शेल मरमे रहिल
ठाकुर वैष्णव-गण करि एइ निबेदन
प्राणेश्वर! निवेदन एइ जन करे
श्री-गुरु-चरण-पद्म, केवल-भकति-सद्म,
राधा-कृष्ण-सेवोन् मुञि जीवने मरणे
कबे कृष्ण-धन पाब हियार माझारे थोब
मोर प्रभु मदन गोपाल
हरि हरि! कबे मोर हैबे सुदिन
हा हा प्रभु ! कर दया करुणा तोमार
अरूण-कमल-दले शेष बिछाइब
एइ नव-दासी बलि श्री-रूप चाहिबे
कि-रूपे पाइब सेवा मुइ दुराचार
कुसुमित वृन्दावने, नाचतो शिखि-गणे,
जय जय श्री-कृष्ण-चैतन्य नित्यानन्द
राधा-कृष्ण! निवेदन एइ जन करे
राधिका-चरण-रेनू भूषन करिया तनू
लोकनाथ प्रभु ! तुमि दया कर मोरे
शुनियाछि साधु-मुखे बले सर्व-जन
श्री-रूप पश्चाते आमि रहिब भीत हञा
हरि हरि! कि मोर करम अभाग
हा हा ! प्रभु लोकनाथ राख पाद-द्वन्द्वे
अजि रसे बादर निशि
आजि रसे बादर निशि
तूमि त दयार सिन्धू अधम-जनार बन्धु
आर कि एमन दशा हब
एइ-बार पाइले देखा चरण दु’ खानि
कदम्ब तरुर डाल नामियाछे भूमे भाल
करङ्ग कौपीन लञा छेँड काँथा गाय दिया
गोवर्धन गिरिवर केवल निर्जन स्थल
गोविन्द गोपीनाथ! कृपा करि राख निजपदे
आन कथा आन ब्यथा नाहि जेन जाञ तथा