Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जनम स फल ता'र कृष्ण दरशन जा'र

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जनम स-फल ता'र कृष्ण-दरशन जा'र भाग्य होइयाछे एक-बार बिकशिया हृन्-नयन कोरि' कृष्ण-दरशन छारे जीब चित्तेर बिकार
अर्थ

जिसने एक बार भी कृष्ण का दर्शन कर लिया, उसका जन्म सफल हो गया, वह भाग्यशाली बन गया। हृदय के नेत्र खोलकर कृष्ण का दर्शन करते ही वह जीव चित्त के सब विकारों को त्याग देता है।

बृन्दाबन-केलि चतुर बन-माली त्रि-भङ्ग-भङ्गिम-रूप बंशी-धारी अपरूप रसमोय-निधि गुण-शाली
अर्थ

वे वृन्दावन की लीलाओं में चतुर हैं और वनमाला पहनते हैं। त्रिभंग मुद्रा में खड़े, बाँसुरी धारण किए उनका रूप अनुपम है। वे रस के भंडार हैं और गुणों से भरे हैं।

बर्ण-नब-जलधर शिरे शिखि-पिच्छ-बर अलक तिलक शोभा पाय परिधन पीत-बास बदने मधुर-हास हेनो रूप जगत माताय
अर्थ

उनका रंग नए बादल जैसा है, सिर पर सुंदर मोर-पंख है। उनकी घुँघराली लटें और तिलक अद्भुत शोभा पाते हैं। वे पीले वस्त्र पहनते हैं, मुख पर मधुर मुस्कान है। ऐसा रूप संसार को मतवाला कर देता है।

इन्द्रनील जिनि' कृष्ण-रूप-खनि हेरिया कदम्ब-मूले मन उचाटन ना चले चरण सोंसार गेलाम भुले
अर्थ

नीलम को भी लजाने वाले, सौंदर्य की खान कृष्ण को कदंब वृक्ष के नीचे देखकर मेरा मन व्याकुल हो उठता है, मेरे पग वहाँ से हटते ही नहीं, और मैं संसार को पूरी तरह भूल जाती हूँ।

(सखी हे) सुधामोय से रूप-माधुरी देखिले नयन होय अचेतन झरे प्रेममोय बारि
अर्थ

हे सखी, उस रूप की अमृत-सी माधुरी को देखते ही मैं अचेत हो जाती हूँ, और मेरी आँखों से प्रेम के आँसू बहने लगते हैं।

किबे चूरा शिरे किब बंशी करे किबे से त्रि-भङ्ग-ठम चरण-कमले आमिया उछले ताहाते नूपुर-दाम
अर्थ

सिर पर मुकुट कैसा शोभायमान है! हाथ में बाँसुरी कैसी सुंदर है! वह त्रिभंग मुद्रा कितनी मनोहर है! उनके चरण-कमलों पर अमृत उमड़ता है, और वहीं झंकृत होती है नूपुरों की माला।

सदा आशा कोरि भृङ्ग-रूप धोरि' चरण-कमले स्थान अनायासे पाइ कृष्ण-गुण गाइ आर ना भजबो आन
अर्थ

मैं सदा यही चाहती हूँ कि भ्रमर बनकर उनके चरण-कमलों में सहज ही स्थान पाऊँ, और वहीं कृष्ण के गुणों का गान करूँ। अब मैं किसी और की उपासना नहीं करूँगी।

इस भजन के बारे में

पद
7

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।