Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
1 टेक
आरे आमार गौर-किशोर नाहि जाने दिबा निशि कारण बिहने हासि मनेर भरमे पहुं भोर
अर्थ

आह! मेरे गौर-किशोर को दिन-रात का ज्ञान नहीं रहता। बिना किसी कारण वे हँस उठते हैं। मेरे प्रभु का हृदय अभिभूत है।

क्षणे उच्चः-स्वरे गाय करे पहुं कि सुधाय कोथाय आमार प्राण-नाथ क्षणे शीते अङ्ग कम्प क्षणे क्षणे दे-इ लम्फ कांहा पाँअ याँअ कार साथ
अर्थ

एक क्षण वे ऊँचे स्वर में पुकार उठते हैं, 'मेरे प्रभु कहाँ हैं? मेरे प्राणनाथ कहाँ हैं?' एक क्षण ठण्ड से उनका शरीर काँपने लगता है। क्षण-क्षण में वे उछल पड़ते हैं। वे कहाँ चले गए?

क्षणे ऊर्ध्व-बाहु करि नाचि बोले फिरि फिरि क्षणे क्षणे करये बिलाप क्षणे आङ्खि-युग मुन्दे हा नाथ बलिया कान्दे क्षणे क्षणे करये सन्ताप
अर्थ

एक क्षण वे दोनों बाहें उठाकर नाचते और गाते हैं। फिर क्षण-क्षण में विलाप करते हैं। एक अन्य क्षण वे आँखें मूँदकर "मेरे प्रभु!" पुकारते हुए रोते हैं। फिर क्षण-क्षण में वे व्यथा से भर जाते हैं।

कहे दास नरहरि आरे मोर गौर-हरि राधार पिरीते हैल हेन ऐछन करिय चिते कलि-युग उद्धारिते बञ्चित ह-इनु मुञि केन
अर्थ

नरहरि दास कहते हैं, मेरे प्रभु गौर-हरि ने वही प्रेम अनुभव किया जो राधा अनुभव करती हैं। हृदय में यह प्रेम धारण करके उन्होंने कलियुग का उद्धार किया। फिर भी मुझ नरहरि का उद्धार क्यों नहीं हुआ? मुझे क्यों वंचित रखा गया?