Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
आसलो कथा बोल्ते कि तोमार् केन्था-धोरा, कप्नि-आँटा-सब फाङ्कि
अर्थ

सच्चाई की बड़ी-बड़ी बातें करते हो तुम! तुम पुराने फटे कम्बल में लिपटे और लंगोटी बांधे हुए किसी त्यागी साधु जैसे दिखते हो, परन्तु यह सब वास्तव में केवल पाखंड है।

धर्म-पत्नी त्यजि' घरे, पर-नारी-सङ्ग कोरे, अर्थ-लोभे द्वारे द्वारे फिरे, राख्ले कि बाकी
अर्थ

अपनी धर्म-पत्नी को घर में छोड़कर तुम दूसरों की पत्नियों का संग करते हो। धन के लोभ में द्वार-द्वार भटकते हो, और चुपके से इतना धन जोड़कर छिपा रखते हो।

तुमि गुरु बोल्छो वटे, साधु-गुरु निष्कपटे, कृष्ण-नाम् देनो कर्ण-पुटे, से कि एमोन् होय् मेकि?
अर्थ

तुम बड़े विश्वास से स्वयं को साधु गुरु के रूप में प्रस्तुत करते हो, और भोले-भाले लोगों के कान में कृष्ण-नाम कहकर उन्हें दीक्षा देने में लगे रहते हो, क्या यह व्यवहार एक बड़ा नाटक नहीं है?

जेबा अन्य शिक्षा देय्, ता'के कि 'गुरु' बोल्ते होय्? दुधेर् फल् तो' घोले नोय्, भेवे' चित्ते देखो देखि
अर्थ

क्या कोई केवल दूसरों को सलाह देने से 'गुरु' कहलाया जा सकता है? दूध का काम छाछ से कभी नहीं चलता। अब इस पर विचार करो और स्वयं देखो जो मैं देख रहा हूँ।

शम-दम-तितिक्षा-बले, उपरति, श्रद्धा हो'ले, तबे भेको चाँद-बाउल्, बोले, एँचडे पेके हबे कि?
अर्थ

शांति, इन्द्रिय-संयम और सहनशीलता के बल पर जब सच्ची श्रद्धा उदय होती है, तब सांसारिक इच्छाएँ स्वयं त्याग दी जाती हैं। ऐसे में त्यागी चाँद बाउल कहते हैं, तुम्हारी इस अपरिपक्व नकल का अंत क्या होगा?