Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बलवान् वैरागी ठाकुर्, किन्तु गृहीर् मध्ये बाहादुर्

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टेक्स्ट
बलवान् वैरागी ठाकुर्, किन्तु गृहीर् मध्ये बाहादुर् आबार् कप्नि पोरे', माला धोरे', बहेन सेवा-दासीर् धूर्
अर्थ

तू स्वयं को बड़ा महान और पूजनीय त्यागी कहता है, परन्तु वास्तव में तू गृहस्थों से भी अधिक भोगी है। इसके अलावा तू दिखावे के लिए लंगोटी पहनता और हाथ में तुलसी-माला रखता है, पर बोझ ढोने वाले पशु की तरह विभिन्न स्त्रियों को अपनी सेवा-दासी बनाने के फंदे में फँसाने का भार उठाता है।

अच्युत-गोत्र-अभिमाने, भिक्षा कोरेन सर्व-स्थाने, टाका-पयसा गणि' ध्याने धारणा प्रचुर् कोरि' चुट्की भिक्षा, कोरेन शिक्षा, वणिग्-वृत्ति पिण्डीशूर्
अर्थ

तू हर जगह भीख माँगता है, गर्व से स्वयं को अच्युत-गोत्र अर्थात् भगवान कृष्ण की शिष्य-परंपरा का बताता है, परन्तु गहरे ध्यान के दिखावे में तू केवल अपने जमा किए रुपयों और दूध का हिसाब लगाता रहता है। तू अपने पेट के लिए भीख माँगने में निपुण है, और दूसरों को शिक्षा देने का स्वांग करते हुए अंत में एक व्यापारी जैसा व्यवहार करता है। तू बड़ा पेटू है, बहुत अधिक भोजन खाने का आदी है।

बोले ता'रे बाउल्-चाँद, एटा तोमार् गलार् फाँद, जीवेर् एइ अपराध शीघ्र कोरो दूर् यजि' गृहीर् धर्म, सु-स्वधर्म, शुद्ध कोरो अन्तःपुर्
अर्थ

ऐसे स्वभाव वालों को चाँद बाउल यह सलाह देते हैं, यह तो तुम्हारे गले का फंदा है। दूसरे जीवों के प्रति ये अपराध तुरंत त्याग दो। गृहस्थ के ईमानदार धर्म में रहकर, अपनी क्षमता के अनुसार अपना कर्तव्य निभाते हुए, भगवान की भक्ति करो और इस प्रकार भीतर से शुद्ध हो जाओ।

न्यासी-मान-आशा त्यजि', दीन-भावे कृष्ण भजि', स्वभाव-गत धर्म यजि', नाश्' दोषाङ्कुर् तबे कृष्ण पा'बे, दुःख जा'बे ह'बे तुमि सु-चतुर्
अर्थ

संन्यासी के रूप में सम्मान पाने की इच्छा त्यागकर विनम्र भाव से कृष्ण की भक्ति करो। अपने स्वभाव के अनुसार धार्मिक कर्तव्य निभाने से तुम्हारे दोषों के अंकुर नष्ट हो जाएँगे। तब तुम कृष्ण को प्राप्त करोगे, तुम्हारा दुःख दूर होगा, और तुम बड़े बुद्धिमान बन जाओगे।