Nandgram Dham
Nandgram Dham Vaishnava Songs · nandgramdham.org/songs

भजहू रे मन

Bhajahū Re Mana Śrī Nanda-nandana — by Govinda Dāsa Kavirāja

Listen

9 versions

Audio courtesy of ISKCON Desire Tree. All glories to the devotee singers.

दिखाएँ
टेक्स्ट
भजहू रे मन श्री-नन्द-नन्दन अभय-चरणारविन्द रे दुर्लभ मानव-जनम सत्-सङ्गे तरोहो ए भव-सिन्धु रे
अर्थ

हे मन, नन्द महाराज के पुत्र के चरण-कमलों की भक्ति कर, जो अभय प्रदान करते हैं। यह दुर्लभ मानव जन्म पाकर, साधु-संगति के सहारे इस भव-सागर को पार कर ले।

शीत आतप बात बरिषण ए दिन जामिनी जागि रे बिफले सेविनु कृपण दुरजन चपल सुख-लब लागि' रे
अर्थ

मैं दिन-रात जागकर सर्दी-गर्मी, हवा और बारिश सहता रहा। क्षणभंगुर सुख के थोड़े से टुकड़े के लिए मैंने व्यर्थ ही दुष्ट और कंजूस लोगों की सेवा की।

ए धन, यौबन, पुत्र, परिजन इथे कि आछे परतीति रे कमल-दल-जल, जीवन टलमल भजहू हरि-पद नीति रे
अर्थ

इस धन, यौवन, पुत्र और परिजनों में सच्चे सुख की क्या गारंटी है? यह जीवन कमल के पत्ते पर पड़ी जल की बूंद के समान डगमगाता रहता है, इसलिए सदा भगवान हरि के चरण-कमलों की भक्ति कर।

श्रवण, कीर्तन, स्मरण, वन्दन, पाद-सेवन, दास्य रे पूजन, सखी-जन, आत्म-निवेदन गोविन्द-दास-अभिलाष रे
अर्थ

गोविन्द दास भगवान हरि की महिमा सुनने, उनका कीर्तन करने, निरन्तर उनका स्मरण करने, उन्हें प्रणाम करने, उनके चरण-कमलों की सेवा करने, उनका दास बनने, उनकी पूजा करने, सखा भाव से उनकी सेवा करने और अपने आपको पूर्णतः उन्हें समर्पित करने की अभिलाषा रखते हैं।