Nandgram Dham
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परम कोरुण पहू दुइ जन

Śrī Śrī Gaura-Nityānander Dayā — The Mercy of Śrī Gaura and Nityānanda

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टेक्स्ट
परम कोरुण, पहू दुइ जन निताइ गौरचन्द्र सब अवतार-सार शिरोमणि केवल आनन्द-कन्द
अर्थ

भगवान निताई और भगवान गौरचन्द्र अत्यन्त दयालु हैं। वे समस्त अवतारों के सार हैं। इन अवतारों की विशेष महिमा यह है कि उन्होंने कीर्तन और नृत्य की ऐसी विधि आरम्भ की जो पूर्णतः आनन्दमय है।

भजो भजो भाइ, चैतन्य निताइ सुदृढ बिश्वास कोरि विषय छाडिया, से रसे मजिया, मुखे बोलो हरि हरि
अर्थ

हे मेरे भाइयो, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि दृढ़ विश्वास और श्रद्धा के साथ भगवान चैतन्य और नित्यानन्द की भक्ति करो। इस विधि से कृष्णभावनामृत को प्राप्त करने के लिए इन्द्रिय-सुख भोगने की प्रवृत्ति को त्यागना आवश्यक है। भगवान चैतन्य और नित्यानन्द की भक्ति में लीन हो जाओ और बिना किसी सांसारिक कामना के केवल 'हरे कृष्ण! हरि हरि!' का कीर्तन करो।

देखो ओरे भाइ, त्रि-भुवने नाइ, एमोन दोयाल दाता पशु पाखी झुरे, पाषाण विदरे, शुनि' जांर गुण-गाथा
अर्थ

हे मेरे भाइयो, इस बात पर विचार करो। तीनों लोकों में भगवान चैतन्य और भगवान नित्यानन्द के समान कोई नहीं है। उनकी दयालुता के गुण इतने महान हैं कि उन्हें सुनकर पशु-पक्षी भी रो पड़ते हैं और पत्थर भी पिघल जाते हैं।

संसारे मजिया, रोहिलि पोरिया, से पदे नहिलो आश आपन करम, भुञ्जाये शमन, कहोये लोचन-दास
अर्थ

परन्तु मुझे, लोचन दास को, यह दुःख है कि मैं इन्द्रिय-सुख भोग में फँसा हुआ हूँ। मुझमें भगवान चैतन्य और भगवान नित्यानन्द के चरण-कमलों के प्रति कोई आकर्षण नहीं है, इसलिए मृत्यु के अधिपति यमराज मुझे यह दण्ड दे रहे हैं कि मुझे इस आन्दोलन के प्रति आकर्षित ही नहीं होने देते।