Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
चैतन्य निता-इ आरे दोन भा-इ नाचे रे खोल करताल पञ्चम रसाल ता थैया ता थैया बाजे रे
अर्थ

आहा! दोनों भाई, गौर और निताई, नाचते हैं! पंचम स्वर में मधुर बजते हुए खोल और करताल बोल उठते हैं, 'ता थैया! ता थैया!'

सोणार कमल करे टलमल प्रेम-सुधा-सिन्धु माझे रे उत्तम अधम दीन-हीन जन ए ढे-उ सभारे बाजे रे
अर्थ

गौर और निताई दिव्य प्रेम के अमृत-सागर में इधर-उधर हिलते हुए दो स्वर्ण कमलों के समान हैं। उस सागर की तरंगें अब हर व्यक्ति पर छलक रही हैं, ऊँच पर, नीच पर, दीन पर और पापी पर।

सात सम्प्रदाय अति उभराय जगन्नाथ गाय रे सभाय देखिछे सर्बत्र नाचिछे एक-काले गोरा-राय
अर्थ

भक्त बड़े कोलाहल के साथ श्री जगन्नाथ की महिमा के गीत गाते हैं। भक्तों को देखकर श्री गौर राय नाचते हैं।

अपूर्ब ऐश्वर्य अपूर्ब माधुर्य प्रकटित ए लीलाय रे यदुनाथ दासे प्रेमानन्दे भासे पहुं कृपा-लब चाय रे
अर्थ

श्री गौर की लीलाएँ अद्भुत ऐश्वर्य और अद्भुत माधुर्य प्रकट करती हैं। यदुनाथ दास अब दिव्य आनन्द और प्रेम के सागर में तैरता है। यदुनाथ प्रभु की कृपा का एक कण पाने की आकांक्षा रखता है।